Yash Sharma

Top 10 of Yash Sharma

    "सुंदर लड़की"
    वो जो सुंदर लड़की थी
    दिल के अंदर रहती थी

    जब वो खुलकर हँसती थी
    मेरी धड़कन बढ़ती थी

    उस के नैना नीले थे
    थोड़े थोड़े गीले थे
    उन पर उस की पलकें थीं
    वो थोड़े शर्मीले थे

    वो सीने से लगती थी
    दिल में राहत जगती थी

    मैं ने चिट्ठी पढ़ ली थी
    वो चाहत में पगली थी

    दिन भर बातें करती थी
    फिर वो आहें भरती थी

    वो तो दिल की चाहत थी
    उस सेे मुझ को राहत थी
    हर दिन उस सेे मिलता था
    लड़की मेरी आदत थी

    जब जब चाहत बढ़ती थी
    उस को उल्फत चढ़ती थी
    फिर महफ़िल में जा कर वो
    मेरी ग़ज़लें पढ़ती थी

    दिल के अंदर रहती थी
    वो जो सुंदर लड़की थी
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    Yash Sharma
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    ठीक वैसा ही था जैसे मिरे दिलबर का था
    तेरे एहसास की ता'रीफ़ मैं करता कैसे
    Yash Sharma
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    इश्क़ तो एक बेक़रारी है
    जो कि अब ज़िंदगी में जारी है

    आज कल इस लिए ख़ुमारी है
    अपनी कुछ मयकशों से यारी है

    और ज़्यादा नशा मुझे होगा
    अब पिलाने की तेरी बारी है

    दोस्तो अब मेरी ग़ज़ल में बस
    दर्द है और बेक़रारी है

    टूट जाता है ढोते ढोते दिल
    तेरी चाहत का बोझ भारी है

    उस की इज़्ज़त हमेशा करना तुम
    दिल तुम्हीं पे वो अपना हारी है

    क्यूँ हमें कोई ग़म नहीं है अब
    हम ने इस ग़म में शब गुज़ारी है
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    Yash Sharma
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    सोचते हैं कि सीख लें ये हुनर
    शे'र कहना हमें नहीं आता
    Yash Sharma
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    जो भी मैं कहता हूँ वो लोगों को झूठा लगता है
    है ये उलझन अब मुझे क्यूँँ उन को ऐसा लगता है

    मुझ को वो काफ़ी परेशानी में रखता है मगर
    जाने क्यूँँ वो शख़्स मुझ को फिर भी अच्छा लगता है

    क्या कहा वो तुम सेे मेरी भी बुराई कर गया
    जो मेरे ख़्वाबों में आ कर मुझ को अपना लगता है

    मैं तो अपनी ज़िंदगी में इतना हारा हूँ कि अब
    दर्द भी मिलता है तो अब वो भी प्यारा लगता है

    कौन आए कौन जाए कौन अब दिल में रहे
    ये ख़याल अब तो मुझे काफ़ी पुराना लगता है

    प्यार में हूँ या यूँँ लगता है कि मैं बर्बाद हूँ
    एक पल में जीना मरना जाने क्या क्या लगता है

    जिस की यादों में कहीं भी मेरा हिस्सा है नहीं
    उस को पाना भी मुझे तो एक सपना लगता है
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    Yash Sharma
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    तुम जुदाई की बात मत करना
    बे-वफ़ाई की बात मत करना

    यार है वो तुम्हारा पर उस सेे
    तुम सगाई की बात मत करना

    मेरे आग़ोश में तू रहती है
    तू रज़ाई की बात मत करना

    कोरा काग़ज़ ही मुझ को भाता है
    रौशनाई की बात मत करना

    उस के गंदे ख़याल अच्छे हैं
    तुम सफ़ाई की बात मत करना
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    Yash Sharma
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    यार हम को मत कहो तुम हम अगर नाराज़ हैं
    हम अगर नाराज़ हैं तो हम कहाँ दम-साज़ हैं
    Yash Sharma
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    आदमी हो या हो औरत एक दिन सब ख़ाक है
    है मुझे हैरत कि फिर क्यूँ सबकी लंबी नाक है

    डाकिए के आते ही फिर मेरी धड़कन बढ़ गई
    ऐसा लगता है कि यारो आई उस की डाक है

    अब हमारा वक़्त यारो और भी बलवान है
    दुश्मनों के एरिया में अब हमारी धाक है

    तोड़ने बर्बाद करने की बड़ी कोशिश की है
    मसअला ये है कि यारो सोच मेरी पाक है

    इस लिए अब आशिक़ी में अपना मन लगता नहीं
    आजकल की आशिक़ी से दिल हमारा चाक है
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    Yash Sharma
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    माँ मुझे जब बुलाती है यारो
    आह दिल चीर जाती है यारो

    कहते हैं शा'इरी छोड़ दे तू
    तब ग़ज़ल और आती है यारो

    ज़िंदगी दोस्ती आशिक़ी भी
    सिर्फ़ मुश्किल बढ़ाती है यारो

    क्या ग़ज़ब रौशनी है ग़ज़ल में
    ज़िंदगी ये दिखाती है यारो

    ये नई बात दिल पे लगी है
    वो हमें अब भुलाती है यारो
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    Yash Sharma
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    काफ़ी पत्थर हैं मेरी राहों में
    पुख़्तगी है मगर इरादों में

    वो जो लड़की निखारती थी मुझे
    ज़िंदगी भर रहेगी यादों में

    मुझ को ठगने में गाली देने में
    यार शामिल हैं इन गुनाहों में

    बात जो मुझ सेे अब नहीं करते
    कोसते होंगे ख़ुद को रातों में

    मिट गया है मिटाने वाला मुझे
    कोई कहता है मेरे कानों में

    बस उन्हें ग़ज़लें रास आती हैं
    इस लिए हूँ मैं उन की आँखों में

    थोड़ी बारिश भी हो रही थी जब
    हाथ मेरा था तेरे हाथों में

    वो मेरी नींद छीन लेती हैं
    कोई जादू है तेरी आहों में

    उस सेे जब भी मिलो तो ये कहना
    'यश' को सोना था उस की बाहों में
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    Yash Sharma
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