मुझे जॉन बनने की हसरत नहीं है
    मैं जय हूँ मुझे जय ही रहने दो यारों
    Jaypratap chauhan
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    इक दफा़ तुम मिलो तो बताएँ तुम्हें
    प्यार कितना हमें ये दिखाएँ तुम्हें

    हम ग़ज़ल लिख रहे हैं तुम्हारे लिए
    तुम सुनो गर सनम तो सुनाएँ तुम्हें
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    Jaypratap chauhan
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    आख़िरी शे'र है ये मिरा
    आख़िरी बार सुन लो मुझे
    Jaypratap chauhan
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    ज़िंदगी से हार कर तुम ख़ुद-कुशी क्यूँ कर रही हो
    जो तुम्हारा है नहीं उस के लिए भी मर रही हो

    मानता हूँ तोड़कर कोई तुम्हारा दिल गया है
    तुम मुझे तो जानती हो क्यूँ भला फिर डर रही हो
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    Jaypratap chauhan
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    यार क़ुर्बत नहीं अब मिरे काम की
    ये सुहूलत नहीं अब मिरे काम की

    आरज़ू अब नहीं है किसी की मुझे
    तो मोहब्बत नहीं अब मिरे काम की

    उस खु़दास नहीं अब मिरा राब्ता
    तो इबादत नहीं अब मिरे काम की

    अब कमाने की चाहत नहीं है मुझे
    तो तिजारत नहीं अब मिरे काम की

    फस गया हूँ मैं ऐसे पस-ओ-पेश में
    ये हिदायत नहीं अब मिरे काम की

    ज़िंदगी चल रही झूठ के आसरे
    तो हक़ीक़त नहीं अब मिरे काम की
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    Jaypratap chauhan
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    दिए जो ख़त तुम्हें हम ने उन्हें तुम ने जलाया क्यूँँ
    किए वादे सभी थे जो नहीं उन को निभाया क्यूँँ
    Jaypratap chauhan
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    कभी जो ख़ुश हुआ करते मिरे बस मुस्कुराने पर
    वही अब दूर जाते हैं मिरे बस पास आने पर

    ग़मों से भागने वाले तुझे इक मशवरा मैं दूँ
    सभी ग़म भाग जाते हैं गले दो घूँट जाने पर
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    Jaypratap chauhan
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    आप को हम यूँँ निगाहों में बसा लेंगे सनम
    आप की फिर हर अदाओं का मज़ा लेंगे सनम

    आप बेहद क़ीमती अस्बाब हो मेरे लिए
    आप को दिल के ख़ज़ाने में सजा लेंगे सनम
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    Jaypratap chauhan
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    इस क़दर तोड़ा मुझे मैं जुड़ नहीं सकता कभी
    मैं परिंदा चोट खाया उड़ नहीं सकता कभी
    Jaypratap chauhan
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    मेरा नसीब एक वफ़ा की तरह रहा
    माँगी बहुत मगर न इनायत मुझे मिली
    Jaypratap chauhan
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