चला है जोश में मक़्तल की ओर जोशीला
    उसी को देख के कितनों को अक़्ल आई है
    Tarun Bharadwaj
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    तुम्हें भूल जाऊँ सही में
    न आँसू बहाऊँ सही में
    Tarun Bharadwaj
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    सुनता नहीं ये दिल मेरी कोई भी बात अब
    मुझ सेे ख़फ़ा हुए हैं ये दिन-और-रात सब

    कह दे कि तेरी सोच में मैं इक ख़याल हूँ
    कह दे तू छोड़ती हूँ मैं भी तेरा साथ अब
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    Tarun Bharadwaj
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    मुझ को समझ रहा है तू शाइ'र फ़लाँ फ़लाँ
    अपनी ही बक रहा हूँ जो दुनिया से है मिला
    Tarun Bharadwaj
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    मुझ
    में नफ़रत न प्यार है अब तो
    जीत कोई न हार है अब तो
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    Tarun Bharadwaj
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    ख़्वाबों में ही सही तू आ तो सही
    दीप उम्मीद का जला तो सही
    Tarun Bharadwaj
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    ज़िंदगी इस तरह कुछ अपनी बसर होती रही
    चाह फूलों की थी काँटों पर गुज़र होती रही
    Tarun Bharadwaj
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    आने का वा'दा करो ऐसे न इनकार करो
    है अगर इश्क़ तो फिर इश्क़ का इज़हार करो
    Tarun Bharadwaj
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    तुम तो थक कर बैठ गए हो मंज़िल कैसे पाओगे
    तन्हा अँधेरी रात बहुत है कैसे दीप जलाओगे
    Tarun Bharadwaj
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    दिल में लगेगा शे'र मेरा तीर की तरह
    मैं भी ग़ज़ल कहूॅंगा कभी मीर की तरह
    Tarun Bharadwaj
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