अक्सर ही ज़ख़्म इश्क़ में पाले हैं औरतें
    पर कितने टूटे मर्द सँभाले हैं औरतें
    Abhishar Geeta Shukla
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    उदास लोग इसी बात से हैं ख़ुश कि चलो
    हमारे साथ हुए हादसों की बात हुई
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    दश्त किनारे इश्क़ पुकारें और कहें ये तुम ही हो
    हर मरहम का घाव लगा लें और कहें ये तुम ही हो

    सबने क्या क्या रूप गढ़े हैं तेरी हुस्न बयानी में
    हम दरिया से चाँद निकालें और कहें ये तुम ही हो

    जितने इश्क़ कहें हों सबने और सुनें हों जितने भी
    सबकी इक तस्वीर बना लें और कहें ये तुम ही हो

    दुनिया की फुलवारी में जो सब सेे सुंदर तितली हो
    उस तितली का हुस्न सँवारें और कहें ये तुम ही हो

    जिस चिड़िया ने पिंजर तोड़ा इश्क़ किया आज़ाद हुई
    उस चिड़िया के पंख निहारें और कहें ये तुम ही हो
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    सोचता हूँ वक़्त की तस्वीर जब मुझ सेे बनेगी
    तो भला उस की कलाई पर घड़ी कैसी लगेगी

    चाय उस से पूछ तो सकता हूँ मैं भी दोस्त,लेकिन
    सोचता हूँ कौन सा वो कहने भर से चल पड़ेगी
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    Abhishar Geeta Shukla
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    सोचा था इश्क़ होगा नहीं इक परी के बा'द
    पर प्यास और बढ़ गई है उस नदी के बा'द

    नाकाम हो जो इश्क़ में तो शा'इरी करो
    जादूगरी से काम लो चारागरी के बा'द

    तब क्या करेगा दोस्त अगर वो नहीं मिली
    जो ज़िन्दगी तू चाहता है ख़ुद-कुशी के बा'द

    फिर भी यक़ीन कर रहा हूँ उस ख़ुदा पे मैं
    जो बेबसी बना रहा है आदमी के बा'द

    कुछ ज़ख़्म मुस्कुराहटों के ऐसे रह गए
    जैसे कि तीरगी के निशाँ चाँदनी के बा'द

    ये दिलजलों की फ़ौज मेरे साथ जाएगी
    कुछ भी नहीं बचेगा यहाँ शा'इरी के बा'द

    हम इश्क़ से निकल चुकी अफ़सुर्दगी में हैं
    इक अजनबी के साथ हैं इक अजनबी के बा'द
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    जब रस्तों को तकने वाला हार गया
    एक मुसाफ़िर चलता चलता हार गया

    इक सफ़हे पर एक कहानी, इश्क़ लिखो
    पेज़ पलट कर बा'द में लिखना, हार गया

    कमज़ोरों से कहना इश्क़ मुक़म्मल था
    सच सुनने वालों से कहना हार गया
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    "लौट आना"
    सुख उन्हें भी कब मिला है
    पर पिता ने ये लिखा है

    देख तू चिंता न करना
    इस समय धीरज सा धरना

    है निशा का घोर डेरा
    दूर दिखता है सवेरा

    भूलना तुम ये नहीं पर
    काल की गति है निरंतर

    कुछ यहाँ रुकता नहीं है
    कल कहीं था कल कहीं है

    याद रखना बात मेरी
    सुख का आना और देरी

    ये नियम कब टूटता है
    हर किसी पर बीतता है

    प्राण है तू बस हमारा
    आँख का ओझल सितारा

    धैर्य तू क्यूँ खो रहा है
    इस तरह क्यूँ रो रहा है

    प्राण अपने खो पड़ूँगा
    तू जो रोया रो पड़ूँगा

    हारने का भय न करना
    दुर्ग़मों की जय न करना

    शैल ही तेरा पता हो
    पर नदी को रास्ता हो

    ये न ढूँढो क्या कहाँ है
    मैं यहाँ हूँ माँ यहाँ है

    बोझ यदि भारी लगे तो
    यदि थकन हारी लगे तो

    हर तपन को भूल जाना
    दुख मिले तो लौट आना

    दुख मिले तो लौट आना
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    दुख तो बहुत मिले हैं मोहब्बत नहीं मिली
    या'नी कि जिस्म मिल गया औरत नहीं मिली

    मुझ को पिता की आँख के आँसू तो मिल गए
    मुझ को पिता से ज़ब्त की आदत नहीं मिली
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    Abhishar Geeta Shukla
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    तो डर रहे हैं आप कहीं हक़ न माँग ले
    या'नी कि सब को खौफ़ है औरत के नाम से
    Abhishar Geeta Shukla
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    तुम को हम ही झूठ लगेंगे लेकिन दरिया झूठा है
    पहले हम को चाँद मिला था फिर दरिया को चाँद मिला
    Abhishar Geeta Shukla
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