''Akbar Rizvi"

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    मुझ को ख़बर हुई न लहद आ गई क़रीब
    किस तर
    हाँ बढ़ रही है ये रफ़्तारें ज़िंदगी
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    ''Akbar Rizvi"
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    दौलते दुनिया के पीछे चल रहा है हर बशर
    हर बशर के पीछे लेकिन है फरिश्ता मौत का
    ''Akbar Rizvi"
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    तेरी याद में इक ग़ज़ल ऐसी गुज़री
    लहू रो रहा था क़लम लिखते लिखते
    ''Akbar Rizvi"
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    माँ की करते हुए ख़िदमत मुझे आ जाए क़ज़ा
    ऐ ख़ुदा एक ये बेटे की दुआ है तुझ सेे
    ''Akbar Rizvi"
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    दोस्ती में हो रहे हैं आज जो वादे वफ़ा
    ये हबीब इबने मज़ाहिर आप का एहसान है
    ''Akbar Rizvi"
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    उस ज़मीदार की दौलत पा ख़ुदा हो लानत
    जिस सेे इक भूके को खाना भी खिलाया न गया
    ''Akbar Rizvi"
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    ज़िंदगी ने बहुत सताया है
    मौत तू ही गले लगा ले मुझे
    ''Akbar Rizvi"
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    खोलूँ ज़बाँ मैं वक़्त के ज़ालिम के सामने
    क़ुव्वत मुझे भी इतनी अता कीजिए इमाम
    ''Akbar Rizvi"
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    ऐसा लगता है मुझे ईद का दिन है 'अकबर'
    जब भी माँ बाप के चेहरे पे ख़ुशी होती है
    ''Akbar Rizvi"
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    लोग खाते हैं गोलियाँ "अकबर"
    हम को चाय सुकून देती है
    ''Akbar Rizvi"
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