Almas Rizvi

Top 10 of Almas Rizvi

    मुझ को अब चैन से जीने की तमन्ना ही नहीं
    बस ये ख़्वाहिश है कि अब चैन से मर जाऊँ मैं
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    दिल ए मरीज़ ने दिल से तुझे पुकारा है
    तू मेरी ज़ीस्त का अब आख़िरी सहारा है
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    सर उठा सकता नहीं कोई यज़ीदी हश्र तक
    कर दिया कुछ इतना ख़म बातिल का सर अब्बास ने
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    दुनिया की नेमतों से है बेज़ार ज़िंदगी
    अब देखती है जीने के आसार ज़िंदगी
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    कोई भी ख़्वाब मुकम्मल नहीं होने देती
    ज़िंदगी चैन से मुझ को नहीं सोने देती
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    तुम्हारी दीद की ख़्वाहिश लिए वो बैठे हैं
    तुम्हारी दीद ही बीमार की शिफ़ा ठहरी
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    उन के बग़ैर दिल नहीं लगता मकान में
    माँ गर नहीं तो कुछ भी नहीं है जहान में
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    कहने वाले तो कह के रहते हैं
    उन का सोचेंगे मर ही जाएँगे
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    दिल में वहशत है एक उलझन है
    आख़िरी रात तो नहीं है मेरी
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    हम को हसरत ही रही कोई हमारा होता
    कुछ तो तन्हाई की रातों में सहारा होता

    दिल ने देखा ही नहीं और किसी की जानिब
    वरना इस दौर में कोई तो हमारा होता
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