Aman G Mishra

Top 10 of Aman G Mishra

    पूछिए मत नाम क्या है
    आप कहिए काम क्या है

    औपचारिकता निभाना
    सुब्ह क्या है शाम क्या है

    भूमिका की क्या ज़रूरत
    जानता हूँ दाम क्या है

    रैलियों के मुख्य वक़्ता
    को पता क्या जाम क्या है

    राजनीतिज्ञों बताओ
    ख़ास क्या है आम क्या है
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    Aman G Mishra
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    जिन लोगों पर मैं विश्वास जताता हूँ
    उन लोगों से ही धोखा खा जाता हूँ

    मैं ने लोगों के चेहरे पढ़ रक्खे हैं
    फिर भी उन की बातों में आ जाता हूँ
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    Aman G Mishra
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    शबो रोज़ की चाकरी ज़िन्दगी की
    मुयस्सर हुईं रोटियाँ दो घड़ी की

    नहीं काम आएँ जो इक दिन मशीनें
    ज़रूरत बने आदमी आदमी की

    कि कल शाम फ़ुरसत में आई उदासी
    बता दी मुझे क़ीमतें हर ख़ुशी की

    किया क्या अमन जी ने बाइस बरस में
    कभी जी लिया तो कभी ख़ुद-कुशी की

    ग़मों को ठिकाने लगाते लगाते
    घड़ी आ गई आदमी के ग़मी की

    ये सारी तपस्या का कारण यही है
    मिसालें बनें तो बनें सादगी की
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    जिन लोगों पर मैं विश्वास जताता हूँ
    उन लोगों से ही धोखा खा जाता हूँ

    मैं ने लोगों के चेहरे पढ़ रक्खे हैं
    फिर भी उन की बातों में आ जाता हूँ
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    प्रेम के हम गीत गाकर क्या करेंगे
    नेह के मनमीत पाकर क्या करेंगे

    हम नहीं हो पाय हैं अब तक ख़ुदी के
    आप को अपना बना कर क्या करेंगे

    जानते हो उलझने हैं ज़िन्दगी में
    आप को उन
    में फँसाकर क्या करेंगे।

    रात भर हैं जागते सपने सँजोते,
    आप की नींदें उड़ाकर क्या करेंगे

    आप जो हैं देख कर मुँह फेर लेते
    आप के सपने सजा कर क्या करेंगे

    आज राहों में बिछे हैं फूल माना
    पाँव के छाले भुला कर क्या करेंगे

    कारना
    में जानती है ज़िन्दगी ये
    ज़िन्दगी से मुँह छुपा कर क्या करेंगे

    अब नहीं होते रुआँसे गाँव तजकर,
    गाँव में इक घर बना कर क्या करेंगे

    ज़िन्दगी भर की कमाई शा'इरी है,
    शा'इरी से जी चुरा कर क्या करेंगे।
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    परिंदे नहीं हम मगर पर हमारे
    ज़मीं की हिफ़ाज़त करें आ
    समाँ से
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    सारी हिम्मत टूट गई, बच्चों से ये सुन कर
    अब भूखे पेट गुज़ारा करने की हिम्मत है

    फूँका घर, भूखे बच्चे, टूटी उम्मीदें, अब
    मुझ
    में, रस्सी को फंदा करने की हिम्मत है
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    उस सेे ये मत पूँछो,क्या करने की हिम्मत है
    जिस
    में सपनों को ज़िंदा करने की हिम्मत है

    आँधी तूफ़ान बवंडर से लड़कर पाई है
    मुझ
    में माटी को दाना करने की हिम्मत है

    अब तो अपनी प्यास बुझेगी बरसातों से ही
    वरना दरिया को प्यासा करने की हिम्मत है

    सरकार हमारी फसलों की कीमत क्या देगी
    उस
    में तो केवल कब्जा करने की हिम्मत है

    सारी हिम्मत टूट गई,बच्चों से ये सुन कर
    अब भूखे पेट गुज़ारा करने की हिम्मत है

    फूँका घर, भूखे बच्चे, टूटी उम्मीदें, अब
    मुझ
    में, रस्सी को फंदा करने की हिम्मत है
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    Aman G Mishra
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    इक अधूरा गीत पूरा कर रहा हूँ
    और ख़ुद को मैं अधूरा कर रहा हूँ

    ये ख़बर फैली कि क़िस्सा कर रहा हूँ
    मैं कि हर क़िस्सा अधूरा कर रहा हूँ

    शा'इरी आसाँ नहीं होती अमन जी
    रोज़ लगता है यही, क्या कर रहा हूँ

    आप को ये प्रेम झूठा लग रहा है
    आप से मैं प्रेम सच्चा कर रहा हूँ

    ज़िन्दगी के गीत भी मैं गा न पाया
    ज़िंदगी में ख़ाक अच्छा कर रहा हूँ
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    Aman G Mishra
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    सुख़न की राह में बढ़ते मुसाफ़िर
    सँभल कर, सामने कोहरा घना है
    Aman G Mishra
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