Ameeq Hanafi

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    सिगरेट जिसे सुलगता हुआ कोई छोड़ दे
    उस का धुआँ हूँ और परेशाँ धुआँ हूँ मैं
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    अर्ज़-ए-मुद्दआ करते क्यूँँ नहीं किया हम ने
    ख़्वाहिशों को हसरत में ख़ुद बदल दिया हम ने

    नित नई उमीदों के टाँक टाँक कर पैवंद
    ज़िंदगी के दामन को उम्र-भर सिया हम ने

    रंज-ओ-ग़म उठाए हैं फ़िक्र-ओ-फ़न भी पाए हैं
    ज़िंदगी को जितना भी जी सके जिया हम ने

    सुब्ह का नया सूरज कुछ तो रौशनी लेगा
    शाम से जलाया है आस का दिया हम ने

    दाग़-ए-दिल की ज़रदारी मुफ़्त हाथ कब आई
    ख़ाक हो के पाया है राज़-ए-कीमिया हम ने
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    है नूर-ए-ख़ुदा भी यहाँ इरफ़ान-ए-ख़ुदा भी
    ये ज़ात कि है वादी-ए-सीना भी हिरा भी

    उस बन में किया करती है तप मेरी अना भी
    इस शहर में है कार-गह-ए-अर्ज़-ओ-समा भी

    करता हूँ तवाफ़ अपना तो मिलती है नई राह
    क़िबला भी है ये ज़ात मिरा क़िबला-नुमा भी

    ख़ुद-आगही ओ ख़ुद-निगही का है ये इनआ'म
    और जुर्म-ए-शनासाई-ए-आलम की सज़ा भी

    होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा सर-ए-एहसास
    जो देखती रहती है मिरी आँख दिखा भी

    करती है कमर-बस्ता सफ़र पर भी यही ज़ात
    जब दूर निकल जाता हूँ देती है सदा भी

    ज़र्रे में है कौनैन तो कौनैन में ज़र्रा
    कुछ है तुझे आवारा-ए-अफ़्लाक पता भी
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    ग़ुबार-ओ-गर्द ने समझा है रहनुमा मुझ को
    तलाश करता फिरा है ये क़ाफ़िला मुझ को

    तवील राह-ए-सफ़र पर हैं फूट फूट पड़ा
    न क्यूँँ समझते मिरे पैर आबला मुझ को

    शिकस्त-ए-दिल की सदा हूँ बिखर भी जाने दे
    ख़ुतूत-ओ-रंग की ज़ंजीर मत पिन्हा मुझ को

    ज़मीन पर है समुंदर फ़लक पे अब्र-ए-ग़ुबार
    उतारती है कहाँ देखिए हवा मुझ को

    सुकूत तर्क-ए-तअ'ल्लुक़ का इक गराँ लम्हा
    बना गया है सदाओं का सिलसिला मुझ को

    वो दूर दूर से अब क्यूँँ मुझे जलाता है
    क़रीब आ के बहुत जो बुझा गया मुझ को

    रचा के एक तिलिस्म-ए-सवाबित-ओ-सय्यार
    कशिश में अपनी बुलाने लगा ख़ला मुझ को
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    मैं भी कब से चुप बैठा हूँ वो भी कब से चुप बैठी है
    ये है विसाल की रस्म अनोखी ये मिलने की रीत नई है

    वो जब मुझ को देख रही थी मैं ने उस को देख लिया था
    बस इतनी सी बात थी लेकिन बढ़ते बढ़ते कितने बढ़ी है

    बे-सूरत बे-जिस्म आवाज़ें अंदर भेज रही हैं हवाएँ
    बंद हैं कमरे के दरवाज़े लेकिन खिड़की खुली हुई है

    मेरे घर की छत के ऊपर सूरज आया चाँद भी उतरा
    छत के नीचे के कमरों की जैसी थी औक़ात वही है
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    कहने को शम-ए-बज़्म-ए-ज़मान-ओ-मकाँ हूँ मैं
    सोचो तो सिर्फ़ कुश्ता-ए-दौर-ए-जहाँ हूँ मैं

    आता हूँ मैं ज़माने की आँखों में रात दिन
    लेकिन ख़ुद अपनी नज़रों से अब तक निहाँ हूँ मैं

    जाता नहीं किनारों से आगे किसी का ध्यान
    कब से पुकारता हूँ यहाँ हूँ यहाँ हूँ मैं

    इक डूबते वजूद की मैं ही पुकार हूँ
    और आप ही वजूद का अंधा कुआँ हूँ मैं

    सिगरेट जिसे सुलगता हुआ कोई छोड़ दे
    उस का धुआँ हूँ और परेशाँ धुआँ हूँ मैं
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    ऐनक के दोनों शीशे ही अटे हुए थे धूल में
    हाथ पड़ गया काँटों पर फूलों के बदले भूल में

    छूते ही आशाएँ बिखरीं जैसे सपने टूट गए
    किस ने अटकाए थे ये काग़ज़ के फूल बबूल में
    इश्क़ के हिज्जे भी जो न जानें वो हैं इश्क़ के दावेदार
    जैसे ग़ज़लें रट कर गाते हैं बच्चे स्कूल में

    अब रातों को भी बाज़ारों में आवारा फिरते हैं
    पहले भँवरे हो जाते थे बंद कँवल के फूल में

    मोटी डालों वाले पेड़ के पत्ते कैसे पीले हैं
    किस ने देखा कौन रोग है छुपा हुआ जड़ मूल में
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    बीन हवा के हाथों में है लहरे जादू वाले हैं
    चंदन से चिकने शानों पर मचल उठे दो काले हैं

    जंगल की या बाज़ारों की धूल उड़ी है स्वागत को
    हम ने घर के बाहर जब भी अपने पाँव निकाले हैं

    कैसा ज़माना आया है ये उल्टी रीत है उल्टी बात
    फूलों को काँटे डसते हैं जो इन के रखवाले हैं

    घर के दुखड़े शहर के ग़म और देस बिदेस की चिंताएँ
    इन में कुछ आवारा कुत्ते हैं कुछ हम ने पाले हैं

    एक उसी को देख न पाए वर्ना शहर की सड़कों पर
    अच्छी अच्छी पोशाकें हैं अच्छी सूरत वाले हैं

    रात में दिल को क्या सूझी है उस के गाँव को चलने की
    जंगल में चीते रहते हैं राह में नद्दी नाले हैं

    दोनों का मिलना मुश्किल है दोनों हैं मजबूर बहुत
    उस के पाँव में मेहंदी लगी है मेरे पाँव में छाले हैं
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    मैं हवा हूँ कहाँ वतन मेरा
    दश्त मेरा न ये चमन मेरा

    मैं कि हर चंद एक ख़ाना-नशीं
    अंजुमन अंजुमन सुख़न मेरा

    बर्ग-ए-गुल पर चराग़ सा क्या है
    छू गया था उसे दहन मेरा

    मैं कि टूटा हुआ सितारा हूँ
    क्या बिगाड़ेगी अंजुमन मेरा

    हर घड़ी इक नया तक़ाज़ा है
    दर्द-ए-सर बन गया बदन मेरा
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    फूल खिले हैं लिखा हुआ है तोड़ो मत
    और मचल कर जी कहता है छोड़ो मत
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