Arbab Shaz

Top 10 of Arbab Shaz

    सोच कर जिस को दिल धड़कता है
    दिल की आवाज़ वो सुनी ही नहीं
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    सोचते हुए मिरी हयात कट गई
    इल्म जब हुआ तो देखा रात कट गई
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    उस ने बचा के मुझ से नज़र ख़ुद-कुशी की है
    मुझ से ही बे-वफ़ाई मिरी ज़िंदगी की है
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    हर मोड़ पे दुनिया में ज़रा चलना सँभल कर
    शैतान यहाँ घूमते हैं भेस बदल कर
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    देनी थी बस ख़याल को इक शक्ल शे'र की
    देते हुए ये रात मिरी नींद उड़ गई
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    पड़े हैं कितने ही मेरे ख़याल कूड़े में
    गुनाह ये है कि बे-बहर की हैं सब बातें
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    इसी वजह से ही रहता हूँ मैं ज़मीं से जुड़ा
    मुझे पता है कि अंजाम क्या है गिरने के बा'द
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    लगा के आग यहाँ नफ़रतों की लोग अभी
    सुकून ढूँढ़ रहे जा के आसमानों में
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    अश्क पलकों से बहाते जाइए
    राज़ आँखों से बताते जाइए

    ख़ुद को आईना बनाते जाइए
    हम को हम से ही मिलाते जाइए

    दोस्ती मुमकिन न हो तो क्या हुआ
    दुश्मनी जम कर निभाते जाइए

    रात होगी जिस से रौशन शहर की
    उन चराग़ों को बुझाते जाइए

    हाल-ए-दिल कहना लगे दुश्वार तो
    शे'र के ज़रिए सुनाते जाइए

    इश्क़ पाकीज़ा मिलेगा आप को
    शाइरों को आज़माते जाइए
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    इश्क़ में 'अरबाब' कोई ज़ोर चलता ही नहीं
    मुब्तला रह कर भी उन सेे प्यार करते जाइए
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