Bhaskar Shukla

Top 10 of Bhaskar Shukla

    ख़्वाहिश सब रखते हैं तुझ को पाने की
    और फिर अपनी अपनी क़िस्मत होती है
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    मैं कैसे मान लूँ कि इश्क़ बस इक बार होता है
    तुझे जितनी दफ़ा देखूँ मुझे हर बार होता है

    तुझे पाने की हसरत और डर ना-कामियाबी का
    इन्हीं दो तीन बातों से ये दिल दो चार होता है
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    आज है उन को आना, मज़ा आएगा
    फिर जलेगा ज़माना, मज़ा आएगा

    तीर उन की नज़र के चलेंगे कई
    दिल बनेगा निशाना मज़ा आएगा
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    इन आँखों का सूनापन ये कहता है
    इन आँखों ने उन आँखों को देखा है
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    तुझ को देखा था जब आख़िरी बार तो
    क्या पता था कि ये आख़िरी बार है
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    बहुत आसान है कहना, बुरा क्या है भला क्या है
    करोगे इश्क़ तब मालूम होगा, मसअला क्या है
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    तुम्हें मैं क्या बताऊँ इस शहर का हाल कैसा है
    यहाँ बारिश तो होती है मगर सावन नहीं आता
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    अगर है इश्क़ सच्चा तो निगाहों से बयाँ होगा
    ज़बाँ से बोलना भी क्या कोई इज़हार होता है
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    रास्ता जब इश्क़ का मौजूद है
    फिर किसी की क्यूँँ इबादत कीजिए?

    ख़ुद-कुशी करना बहुत आसान है
    कुछ बड़ा करने की हिम्मत कीजिए
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    छोड़ो दुनिया की परवाहें, करो मोहब्बत
    मुश्किल हों कितनी भी राहें, करो मोहब्बत

    सुन कर देखो सारे मंदिर यही कहेंगे
    यही कहेंगी सब दरगाहें, करो मोहब्बत
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