Charagh Sharma

Top 10 of Charagh Sharma

    वो हँस के देखती होती तो उस सेे बात करते
    कोई उम्मीद भी होती तो उस सेे बात करते

    हम स्टेशन से बाहर आए इस अफ़सोस के साथ
    वो लड़की अजनबी होती तो उस सेे बात करते

    हमारे जाम आधी हौसला-अफ़ज़ाई कर पाए
    अगर उस ने भी पी होती तो उस सेे बात करते

    हम उस के झुमकों की लरज़िश पे अक्सर सोचते हैं
    हवा से दोस्ती होती तो उस सेे बात करते

    ये ख़ामोशी भी क्या है गुफ़्तगू की इंतेहा है
    कोई बात अनकही होती तो उस सेे बात करते

    तवज्जोह से बहुत शर्माती है आवाज़ अपनी
    अगर वो सो रही होती तो उस सेे बात करते

    किसी से बात करना इतना मुश्किल भी नहीं था
    किसी ने बात की होती तो उस सेे बात करते
    Read Full
    Charagh Sharma
    26 Likes
    अहमियत अब तेरी कॉलर के बटन जितनी है
    न हो तो भी कोई दिक़्क़त नहीं हो भी तो भी
    Charagh Sharma
    63 Likes
    इतने अफ़सुर्दा नहीं हैं हम कि कर लें ख़ुद-कुशी
    और न इतने ख़ुश कि सच में मरने की ख़्वाहिश न हो
    Charagh Sharma
    62 Likes
    तुम्हारा क्या है तुम्हें सिर्फ़ ज्ञान देना है
    हमारी सोचो हमें इम्तिहान देना है

    गुलाब भी हैं गुलाबों में ख़ार भी हैं बता
    निशानी देनी है या फिर निशान देना है

    तेरा सवाल मेरी जान का सवाल है और
    जवाब देने से आसान जान देना है

    उन्होंने अपने मुताबिक़ सज़ा सुना दी है
    हमें सज़ा के मुताबिक़ बयान देना है

    ये बेज़ुबानों की महफ़िल है दोस्त याद रहे
    यहाँ ख़मोशी का मतलब ज़बान देना है
    Read Full
    Charagh Sharma
    39 Likes
    "उस के हाथ में फूल है" मत कहिए, कहिए
    उस का हाथ है फूल को फूल बनाने में
    Charagh Sharma
    76 Likes
    ख़ुदा, फ़रिश्ते, पयम्बर, बशर किसी का नहीं
    मुझे लिहाज़ तो सबका है डर किसी का नहीं
    Charagh Sharma
    51 Likes
    तितली से दोस्ती न गुलाबों का शौक़ है
    मेरी तरह उसे भी किताबों का शौक़ है
    Charagh Sharma
    99 Likes
    तितली से दोस्ती न गुलाबों का शौक़ है
    मेरी तरह उसे भी किताबों का शौक़ है

    वर्ना तो नींद से भी नहीं कोई ख़ास रब्त
    आँखों को सिर्फ़ आप के ख़्वाबों का शौक़ है

    हम आशिक़-ए-ग़ज़ल हैं तो मग़रूर क्यूँ न हों
    आख़िर ये शौक़ भी तो नवाबों का शौक़ है

    उस शख़्स के फ़रेब से वाक़िफ़ हैं हम मगर
    कुछ अपनी प्यास को ही सराबों का शौक़ है

    गिरने दो ख़ुद सँभलने दो ऐसे ही चलने दो
    ये तो 'चराग़' ख़ाना-ख़राबों का शौक़ है
    Read Full
    Charagh Sharma
    27 Likes
    उड़ते हैं गिरते हैं फिर से उड़ते हैं
    उड़ने वाले उड़ते उड़ते उड़ते हैं

    कोई उस बूढे पीपल से कह आओ
    पिंजरे में हम ख़ूब मज़े से उड़ते हैं

    हाए वो चिड़िया उड़ मैना उड़ के झगड़े
    और फिर साबित करना बकरे उड़ते हैं

    पिंजरे में दाना पानी सब रक्खा है
    और परिंदे भूके प्यासे उड़ते हैं

    देख रहे हैं हम भी जवानी के मौसम
    बंद हवा में कैसे दुपट्टे उड़ते हैं

    इस तोते का पिंजरा खोलो फिर देखो
    कैसे इस तोते के तोते उड़ते हैं
    Read Full
    Charagh Sharma
    16 Likes
    याद भूले हुए लोगों को किया जाता है
    भूल जाओ कि तुम्हें याद किया जाएगा
    Charagh Sharma
    65 Likes

Top 10 of Similar Writers