Gulzar

Top 10 of Gulzar

    मुझ को इतने से काम पे रख लो
    जब भी सीने में झूलता लॉकेट
    उल्टा हो जाए तो मैं हाथों से
    सीधा करता रहूँ उस को

    जब भी आवेज़ा उलझे बालों में
    मुस्कुरा के बस इतना-सा कह दो
    'आह, चुभता है ये, अलग कर दो।'

    जब ग़रारे में पाँव फँस जाए
    या दुपट्टा किसी किवाड़ से अटके
    इक नज़र देख लो तो काफ़ी है

    'प्लीज़' कह दो तो अच्छा है
    लेकिन मुस्कुराने की शर्त पक्की है
    मुस्कुराहट मुआवज़ा है मेरा

    मुझ को इतने से काम पे रख लो
    Read Full
    Gulzar
    10
    69 Likes
    शाम से आँख में नमी सी है
    आज फिर आप की कमी सी है

    दफ़्न कर दो हमें कि साँस आए
    नब्ज़ कुछ देर से थमी सी है

    कौन पथरा गया है आँखों में
    बर्फ़ पलकों पे क्यूँँ जमी सी है

    वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर
    आदत इस की भी आदमी सी है

    आइए रास्ते अलग कर लें
    ये ज़रूरत भी बाहमी सी है
    Read Full
    Gulzar
    18 Likes
    दर्द हल्का है साँस भारी है
    जिए जाने की रस्म जारी है

    आप के ब'अद हर घड़ी हम ने
    आप के साथ ही गुज़ारी है

    रात को चाँदनी तो ओढ़ा दो
    दिन की चादर अभी उतारी है

    शाख़ पर कोई क़हक़हा तो खिले
    कैसी चुप सी चमन पे तारी है

    कल का हर वाक़िआ' तुम्हारा था
    आज की दास्ताँ हमारी है
    Read Full
    Gulzar
    15 Likes
    दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई
    जैसे एहसाँ उतारता है कोई

    दिल में कुछ यूँँ सँभालता हूँ ग़म
    जैसे ज़ेवर सँभालता है कोई

    आइना देख कर तसल्ली हुई
    हम को इस घर में जानता है कोई

    पेड़ पर पक गया है फल शायद
    फिर से पत्थर उछालता है कोई

    देर से गूँजते हैं सन्नाटे
    जैसे हम को पुकारता है कोई
    Read Full
    Gulzar
    7 Likes
    कितनी लंबी ख़ामोशी से गुज़रा हूँ
    उन से कितना कुछ कहने की कोशिश की
    Gulzar
    45 Likes
    कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़
    किसी की आँख में हम को भी इंतिज़ार दिखे
    Gulzar
    88 Likes
    आइना देख कर तसल्ली हुई
    हम को इस घर में जानता है कोई
    Gulzar
    55 Likes
    वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर
    आदत इस की भी आदमी सी है
    Gulzar
    114 Likes
    याद है एक दिन?
    मेरी मेज़ पे बैठे-बैठे
    सिगरेट की डिबिया पर तुम ने
    एक स्केच बनाया था

    आ कर देखो
    उस पौधे पर फूल आया है.
    Read Full
    Gulzar
    2
    37 Likes
    मैं सिगरेट तो नहीं पीता
    मगर हर आने वाले से पूछ लेता हूँ कि "माचिस है?"
    बहुत कुछ है जिसे मैं फूँक देना चाहता हूँ.
    Read Full
    Gulzar
    1
    108 Likes

Top 10 of Similar Writers