जब भी उस शोख़ लब-ए-लाल की लाली देखूॅं
    उस की हर दीद में ईद और दिवाली देखूॅं
    'June' Sahab Barelvi
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    चाँद और आसमान कहते हैं
    हर सितारे में जगमगाती तुम
    'June' Sahab Barelvi
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    लिख रहा हूँ नई ग़ज़ल फिर से
    'तन्हा रातों में पास आती तुम'
    'June' Sahab Barelvi
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    हज़ारों तख्ति़यों पर है लिखा ये
    ख़ुदा है ग़र है वो मेहमान कोई
    'June' Sahab Barelvi
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    उड़ती पेड़ों से जब कोई चिड़िया
    उस के बदले में चहचहाती तुम
    'June' Sahab Barelvi
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    ये काजल ये बिंदी ये लाली ये सुरमा
    अदाओं से अपनी ग़ज़ब ढाने वाले
    'June' Sahab Barelvi
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    भले वो साथ थे कुछ पल सफ़र में
    न बाक़ी अब रहा अरमान कोई
    'June' Sahab Barelvi
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    बने इंसान अगर इंसान कोई
    रहे ग़म से न फिर अंज़ान कोई
    'June' Sahab Barelvi
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    उसे निकाह करना था
    मुझे विवाह करना था
    'June' Sahab Barelvi
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    उन सेे सामना हो जाए अब,
    कोई मोजज़ा हो जाए अब
    'June' Sahab Barelvi
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