Kumar Vishwas

Top 10 of Kumar Vishwas

    बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं
    प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं
    Kumar Vishwas
    141 Likes
    दौलत ना अता करना मौला, शोहरत ना अता करना मौला
    बस इतना अता करना चाहे जन्नत ना अता करना मौला
    शम्मा-ए-वतन की लौ पर जब कुर्बान पतंगा हो
    होंठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो
    होंठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो

    बस एक सदा ही सुनें सदा बर्फ़ीली मस्त हवाओं में
    बस एक दुआ ही उठे सदा जलते-तपते सेहराओं में
    जीते-जी इस का मान रखें
    मर कर मर्यादा याद रहे
    हम रहें कभी ना रहें मगर
    इस की सज-धज आबाद रहे
    जन-मन में उच्छल देश प्रेम का जलधि तरंगा हो
    होंठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो
    होंठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो

    गीता का ज्ञान सुने ना सुनें, इस धरती का यशगान सुनें
    हम सबद-कीर्तन सुन ना सकें भारत मां का जयगान सुनें
    परवरदिगार,मैं तेरे द्वार
    पर ले पुकार ये आया हूँ
    चाहे अज़ान ना सुनें कान
    पर जय-जय हिन्दुस्तान सुनें
    जन-मन में उच्छल देश प्रेम का जलधि तरंगा हो
    होंठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो
    होंठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो
    Read Full
    Kumar Vishwas
    9
    66 Likes
    मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया
    न जाने अब किस के कितने रह गए हम
    Kumar Vishwas
    272 Likes
    ख़ुद से भी मिल न सको, इतने पास मत होना
    इश्क़ तो करना, मगर देवदास मत होना

    देखना, चाहना, फिर माँगना, या खो देना
    ये सारे खेल हैं, इन
    में उदास मत होना
    Read Full
    Kumar Vishwas
    118 Likes
    फिर मिरी याद आ रही होगी
    फिर वो दीपक बुझा रही होगी

    फिर मिरे फेसबुक पे आ कर वो
    ख़ुद को बैनर बना रही होगी

    अपने बेटे का चूम कर माथा
    मुझ को टीका लगा रही होगी

    फिर उसी ने उसे छुआ होगा
    फिर उसी से निभा रही होगी

    जिस्म चादर सा बिछ गया होगा
    रूह सिलवट हटा रही होगी

    फिर से इक रात कट गई होगी
    फिर से इक रात आ रही होगी
    Read Full
    Kumar Vishwas
    53 Likes
    कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है
    मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है
    Kumar Vishwas
    66 Likes
    कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है
    मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है
    Kumar Vishwas
    82 Likes
    तुम्हारा फ़ोन आया है
    अजब सी ऊब शामिल हो गई है रोज़ जीने में
    पलों को दिन में, दिन को काट कर जीना महीने में
    महज़ मायूसियाँ जगती हैं अब कैसी भी आहट पर
    हज़ारों उलझनों के घोंसले लटके हैं चौखट पर
    अचानक सब की सब ये चुप्पियाँ इक साथ पिघली हैं
    उम्मीदें सब सिमट कर हाथ बन जाने को मचली हैं
    मेरे कमरे के सन्नाटे ने अँगड़ाई सी तोड़ी है
    मेरी ख़ामोशियों ने एक नग़्मा गुनगुनाया है
    तुम्हारा फ़ोन आया है, तुम्हारा फ़ोन आया है

    सती का चैतरा दिख जाए जैसे रूप-बाड़ी में
    कि जैसे छठ के मौक़े' पर जगह मिल जाए गाड़ी में
    मेरी आवाज़ से जागे तुम्हारे बाम-ओ-दर जैसे
    ये नामुमकिन सी हसरत है, ख़याली है, मगर जैसे
    बड़ी नाकामियों के बा'द हिम्मत की लहर जैसे
    बड़ी बेचैनियों के बा'द राहत का पहर जैसे
    बड़ी गुमनामियों के बा'द शोहरत की मेहर जैसे
    सुब्ह और शाम को साधे हुए इक दोपहर जैसे
    बड़े उनवान को बाँधे हुए छोटी बहर जैसे
    नई दुल्हन के शरमाते हुए शाम-ओ-सहर जैसे
    हथेली पर रची मेहँदी अचानक मुस्कुराई है
    मेरी आँखों में आँसू का सितारा जगमगाया है
    तुम्हारा फ़ोन आया है, तुम्हारा फ़ोन आया है
    Read Full
    Kumar Vishwas
    3
    81 Likes
    कबूतर इश्क़ का उतरे तो कैसे?
    तुम्हारी छत पे निगरानी बहुत है

    इरादा कर लिया गर ख़ुद-कुशी का
    तो ख़ुद की आँख का पानी बहुत है
    Read Full
    Kumar Vishwas
    93 Likes
    सखियों संग रँगने की धमकी सुन कर क्या डर जाऊँगा
    तेरी गली में क्या होगा ये मालूम है पर आऊँगा
    Kumar Vishwas
    69 Likes

Top 10 of Similar Writers