इल्म जब होगा किधर जाना है 
    हाए तब तक तो गुज़र जाना है 
    Madan Mohan Danish
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    है दुख तो कह दो किसी पेड़ से परिंदे से
    अब आदमी का भरोसा नहीं है प्यारे कोई
    Madan Mohan Danish
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    पत्थर पहले ख़ुद को पत्थर करता है
    उस के बा'द ही कुछ कारीगर करता है

    एक ज़रा सी कश्ती ने ललकारा है
    अब देखें क्या ढोंग समुंदर करता है

    कान लगा कर मौसम की बातें सुनिए
    क़ुदरत का सब हाल उजागर करता है

    उस की बातों में रस कैसे पैदा हो
    बात बहुत ही सोच-समझकर करता है

    जिस को देखो 'दानिश' का दीवाना है
    क्या वो कोई जादू-मंतर करता है
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    Madan Mohan Danish
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    हमें पता है कि मसरूफ़ हो बहुत फिर भी
    हमारी दस्तकें सुनते रहो ज़मीर हैं हम
    Madan Mohan Danish
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    ये कहाँ की रीत है जागे कोई सोए कोई
    रात सब की है तो सब को नींद आनी चाहिए
    Madan Mohan Danish
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    हम अपने दुख को गाने लग गए हैं
    मगर इस में ज़माने लग गए हैं

    किसी की तर्बियत का है करिश्मा
    ये आँसू मुस्कुराने लग गए हैं

    कहानी रुख़ बदलना चाहती है
    नए किरदार आने लग गए हैं

    ये हासिल है मिरी ख़ामोशियों का
    कि पत्थर आज़माने लग गए हैं

    ये मुमकिन है किसी दिन तुम भी आओ
    परिंदे आने जाने लग गए हैं

    जिन्हें हम मंज़िलों तक ले के आए
    वही रस्ता बताने लग गए हैं

    शराफ़त रंग दिखलाती है 'दानिश'
    कई दुश्मन ठिकाने लग गए हैं
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    Madan Mohan Danish
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    दर्द सीने में छुपाए रक्खा
    हम ने माहौल बनाए रक्खा

    मौत आई थी कई दिन पहले
    उस को बातों में लगाए रक्खा

    दश्त में आई बला टलने तक
    शोर चिड़ियों ने मचाए रक्खा

    वरना तारों को शिकायत होती
    हम ने हर ज़ख़्म छुपाए रक्खा

    काम दुश्वार था फिर भी दानिश
    ख़ुद को आसान बनाए रक्खा
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    Madan Mohan Danish
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    बीच भँवर से कश्ती कैसे बच निकली
    बहुत दिनों तक दरिया भी हैरान रहा
    Madan Mohan Danish
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    अब लगता है ठीक कहा था 'ग़ालिब' ने
    बढ़ते बढ़ते दर्द दवा हो जाता है
    Madan Mohan Danish
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    इश्क़ कहता है भटकते रहिए
    और तुम कहते हो घर जाना है
    Madan Mohan Danish
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