Mohammad Alvi

Top 10 of Mohammad Alvi

    'अल्वी' ये मो'जिज़ा है दिसम्बर की धूप का
    सारे मकान शहर के धोए हुए से हैं
    Mohammad Alvi
    35 Likes
    अब तो चुप-चाप शाम आती है
    पहले चिड़ियों के शोर होते थे
    Mohammad Alvi
    33 Likes
    मौत न आई तो 'अल्वी'
    छुट्टी में घर जाएँगे
    Mohammad Alvi
    37 Likes
    उस से मिले ज़माना हुआ लेकिन आज भी
    दिल से दुआ निकलती है ख़ुश हो जहाँ भी हो
    Mohammad Alvi
    29 Likes
    सर्दी में दिन सर्द मिला
    हर मौसम बे-दर्द मिला

    ऊँचे लम्बे पेड़ों का
    पत्ता पत्ता ज़र्द मिला
    Read Full
    Mohammad Alvi
    39 Likes
    आग अपने ही लगा सकते हैं
    ग़ैर तो सिर्फ़ हवा देते हैं
    Mohammad Alvi
    36 Likes
    दिन इक के बा'द एक गुज़रते हुए भी देख
    इक दिन तू अपने आप को मरते हुए भी देख

    हर वक़्त खिलते फूल की जानिब तका न कर
    मुरझा के पत्तियों को बिखरते हुए भी देख

    हाँ देख बर्फ़ गिरती हुई बाल बाल पर
    तपते हुए ख़याल ठिठुरते हुए भी देख

    अपनों में रह के किस लिए सहमा हुआ है तू
    आ मुझ को दुश्मनों से न डरते हुए भी देख

    पैवंद बादलों के लगे देख जा-ब-जा
    बगलों को आसमान कतरते हुए भी देख

    हैरान मत हो तैरती मछली को देख कर
    पानी में रौशनी को उतरते हुए भी देख

    उस को ख़बर नहीं है अभी अपने हुस्न की
    आईना दे के बनते-सँवरते हुए भी देख

    देखा न होगा तू ने मगर इंतिज़ार में
    चलते हुए समय को ठहरते हुए भी देख

    ता'रीफ़ सुन के दोस्त से 'अल्वी' तू ख़ुश न हो
    उस को तिरी बुराइयाँ करते हुए भी देख
    Read Full
    Mohammad Alvi
    5 Likes
    नया साल दीवार पर टाँग दे
    पुराने बरस का कैलेंडर गिरा
    Mohammad Alvi
    19 Likes
    धूप ने गुज़ारिश की
    एक बूँद बारिश की

    लो गले पड़े काँटे
    क्यूँँ गुलों की ख़्वाहिश की

    जगमगा उठे तारे
    बात थी नुमाइश की

    इक पतिंगा उजरत थी
    छिपकिली की जुम्बिश की

    हम तवक़्क़ो' रखते हैं
    और वो भी बख़्शिश की

    लुत्फ़ आ गया 'अल्वी'
    वाह ख़ूब कोशिश की
    Read Full
    Mohammad Alvi
    3 Likes
    सदियों से किनारे पे खड़ा सूख रहा है
    इस शहर को दरिया में गिरा देना चाहिए
    Mohammad Alvi
    24 Likes

Top 10 of Similar Writers