Harsh Kumar

Top 10 of Harsh Kumar

    अब ये सितम भी ख़ुद पे है
    हम और जीना चाहते हैं
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    यारों उस की ख़ुशी के लिए
    मर जाना ही बेहतर था
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    वो हैं महफ़ूज़ जो हैं क़ैद में यारों
    अगर हम सेे हुए आज़ाद रोयेंगे
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    हम सेे मिलिए नशे की हालत में
    बिन पिए होश ही नहीं रहता
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    भलाई है कि जोकर ही रहे हम
    यहाँ हर ताश इक्का हो गया है
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    ज़मीं से उस का सौदा हो गया है
    हमारा बीज पौधा हो गया है
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    निकल आई हो तुम उस चाँद जैसे
    न जाने कितनों की अब रात होगी
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    सफ़र में इस तरह से ज़िंदगी को ख़त्म करना है
    ख़ुदी का क़त्ल कर के ख़ुद को ही क़ातिल बनाना है
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    मुकम्मल हो गई ग़ज़लें हमारी
    वो जब से पढ़ रहे लिक्खा हमारा
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    जो बताती थी कि शादी तुम सेे होगी
    उस की शादी में मिरी दावत नहीं है
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