Nadir Ariz

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    ए'तिबार आता नहीं तो आज़मा के देख ले
    हम तेरे सब चाहने वालों में अव्वल आएँगे
    Nadir Ariz
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    वक़्त देता था वो मिलने का तभी रक्खी थी
    दोस्त इक दौर था मैं ने भी घड़ी रक्खी थी
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    बोले तो अच्छा बुरा महसूस हो
    उस की ख़ामोशी से क्या महसूस हो

    इस तरह दीवार पर तस्वीर रख
    आदमी बैठा हुआ महसूस हो

    दाम मुँह माँगे मिलेंगे और नक़्द
    क़त्ल लेकिन हादसा महसूस हो

    रख लिया अख़बार पैसों की जगह
    ताकि बटुआ कुछ भरा महसूस हो

    देखना चाहूँ उसे तो हर कोई
    मेरी जानिब' देखता महसूस हो

    पास जाने पर खुले प्यासे पे रेत
    दूर से पानी खड़ा महसूस हो
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    Nadir Ariz
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    तेरी तस्वीर हमेशा है मिरी नज़रों में
    ये सहूलत भी ज़ियादा है मिरी नज़रों में

    दूसरे इश्क़ में नुक़सान का ख़दशा कम है
    ये सड़क उस सेे कुशादा है मिरी नज़रों में

    रूप देना है कोई दिल की उदासी को मुझे
    डूबती नाव का ख़ाका है मिरी नज़रों में

    इस जगह आके ठहर जाता है मंज़र जैसे
    आप के बा'द अँधेरा है मिरी नज़रों में

    उस हवेली से बहुत गहरा तअल्लुक़ था मिरा
    उस का एक और भी रस्ता है मिरी नज़रों में

    मैं मुहब्बत के ख़दो-ख़ाल से वाक़िफ़ तो नहीं
    अपने माँ बाप का ख़ाका है मिरी नज़रों में
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    Nadir Ariz
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    चाहे जाने की भी ख़ुशी नहीं है
    उस को ख़्वाहिश विसाल की नहीं है

    इस लिए खेल से निकल गया हूँ
    ये मिरी जीत की घड़ी नहीं है

    हिज्र की रात कट नहीं रही दोस्त
    और ये रात आख़िरी नहीं है

    तुम तो हर शख़्स से ये कहते हो
    आप से जान क़ीमती नहीं है

    इस सेे ऊँचे पहाड़ सर किए हैं
    जीत मेरे लिए नई नहीं है

    वो बताता रहा गढ़े का मुझे
    मैं ने उस शख़्स की सुनी नहीं है
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    Nadir Ariz
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    तमाम शह्‌र को हुलिया बता दिया गया है
    मिरे फ़रार को मुश्किल बना दिया गया है

    बस एक ज़िद कि उसे देखना है बारे-दिगर
    जो काम आए थे उस को भुला दिया गया है

    मैं जाँनिसार हूँ या बे-वफ़ा बताओ मुझे
    तुम्हें लहू का नमूना दिखा दिया गया है

    बस उस को माँगता रहता हूँ घर में बैठे हुए
    मुझे दु'आओं का चस्का लगा दिया गया है

    हमें तलाशने वालों का रोक कर रस्ता
    हमारे बारे तजस्सुस बढ़ा दिया गया है
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    अपनी ख़ुद्दारी तो पामाल नहीं कर सकते
    उस का नंबर है मगर काल नहीं कर सकते

    सीम जाएगा तो फिर नक़्श उभारेंगे कोई
    काम दीवार पे फ़िलहाल नहीं कर सकते

    रह भी सकता है तिरा नाम कहीं लिक्खा हुआ
    सारे जंगल की तो पड़ताल नहीं कर सकते

    दोस्त तस्वीर बहुत दूर से खींची गई है
    हम उजागर ये ख़द-ओ-ख़ाल नहीं कर सकते

    रोती आँखों पे मियाँ हाथ तो रख सकते हैं
    पेश अगर आप को रूमाल नहीं कर सकते

    दे न दे काम की उजरत ये है मर्ज़ी उस की
    पेशा-ए-इश्क़ में हड़ताल नहीं कर सकते

    दश्त आए जिसे वहशत की तलब हो 'नादिर'
    ये ग़िज़ा शहर हम इर्साल नहीं कर सकते
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    Nadir Ariz
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    इतना प्यारा है वो चेहरा कि नज़र पड़ते ही
    लोग हाथों की लकीरों की तरफ़ देखते हैं
    Nadir Ariz
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    मैं चूमता हूँ तो वो हाथ खींच लेता है
    उसे पता है ये सीढ़ी कहाँ पे जानी है
    Nadir Ariz
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    रह भी सकता है कहीं नाम तेरा लिक्खा हुआ
    सारे जंगल की तो पड़ताल नहीं कर सकते
    Nadir Ariz
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