“हमारा मिलना”
जब तुम मुझ सेे मिलने आती थी
मैं कितना बेसब्री से इंतिज़ार करता था
जब तुम मेरे पास आ जाती थी
मेरा दिल तेज़ी से धड़कने लगता था
जब तुम पास मेरे बैठा करती थी
मैं बस तुम को ही देखता रहता था
तुम धी
में से मुस्कराया करती थी
तुम उस वक़्त बहुत ही प्यारी लगती थी
ऐसा लगता था ये लम्हा यहीं थम जाए
मैं धीरे से तुम सेे बोला करता था
तुम प्यार से जवाब दिया करती थी
जब मैं नाराज़ हो जाता था
तब तुम मुझे प्यार से मनाती थी
मैं तुम सेे न जाने क्या क्या पूछता था
तुम सब कुछ प्यार से समझाती थी
तुम कितने शांत सी बैठा करती थी
मैं कितना परेशान किया करता था
जब तुम प्यार से गाल को चूमती थी
मुझे बहुत बहुत बहुत अच्छा लगता था
तुम बस एक घंटे के लिए आया करती थी
मैं तुम्हारे होंठों को कितनी बार चूमता था
तुम कभी कभी मेरी गोद में बैठा करती थी
मेरा मोबाइल बच्चों की तरह चलाया करती थी
जब तुम घर को वापस जाया करती थी
मैं तुम को देर तक गले लगाता था
तुम ख़ुद को मुझ सेे छुड़ाया करती थी
मैं कस कर तुम को पकड़े रखता था
जब तुम मुझ सेे मिलने आया करती थी
कितनी प्यारी प्यारी बातें किया करते थे
मन करता है वो लम्हें वो यादें वो दिन
फिर से आ जाए फिर से हम वही शा
में
वही दिन वही मुलाक़ातें वही ज़िन्दगी जिएँ
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