ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है
    क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
    Sahir Ludhianvi
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    जो मिल गया उसी को मुक़द्दर समझ लिया
    जो खो गया मैं उस को भुलाता चला गया
    Sahir Ludhianvi
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    कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया
    बात निकली तो हर इक बात पे रोना आया

    हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उन को
    क्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया

    किस लिए जीते हैं हम किस के लिए जीते हैं
    बारहा ऐसे सवालात पे रोना आया

    कौन रोता है किसी और की ख़ातिर ऐ दोस्त
    सब को अपनी ही किसी बात पे रोना आया
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    Sahir Ludhianvi
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    तू मुझे छोड़ के ठुकरा के भी जा सकती है
    तेरे हाथों में मेरे हाथ हैं ज़ंजीर नहीं
    Sahir Ludhianvi
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    ग़म और ख़ुशी में फ़र्क़ न महसूस हो जहाँ
    मैं दिल को उस मक़ाम पे लाता चला गया
    Sahir Ludhianvi
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    देखा है ज़िन्दगी को कुछ इतने क़रीब से
    चेहरे तमाम लगने लगे हैं अजीब से
    Sahir Ludhianvi
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    वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन
    उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
    Sahir Ludhianvi
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    हज़ार बर्क़ गिरे लाख आँधियाँ उट्ठें
    वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं
    Sahir Ludhianvi
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    मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है
    पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है

    मुझ से पहले कितने शाइ'र आए और आ कर चले गए
    कुछ आहें भर कर लौट गए, कुछ नग़
    में गा कर चले गए
    वे भी एक पल का क़िस्सा थे, मैं भी एक पल का क़िस्सा हूँ
    कल तुम से जुदा हो जाऊँगा गो आज तुम्हारा हिस्सा हूँ

    मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है
    पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है

    कल और आएँगे नग़मों की खिलती कलियाँ चुनने वाले
    मुझ सेे बेहतर कहने वाले, तुम सेे बेहतर सुनने वाले
    कल कोई मुझ को याद करे, क्यूँ कोई मुझ को याद करे
    मसरुफ़ ज़माना मेरे लिए, क्यूँ वक़्त अपना बर्बाद करे

    मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है
    पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है

    मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है
    हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है

    रिश्तों का रूप बदलता है, बुनियादें ख़त्म नहीं होतीं
    ख़्वाबों और उमँगों की मियादें ख़त्म नहीं होतीं
    इक फूल में तेरा रूप बसा, इक फूल में मेरी जवानी है
    इक चेहरा तेरी निशानी है, इक चेहरा मेरी निशानी है

    मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है
    हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है

    तुझ को मुझ को जीवन अमृत अब इन हाथों से पीना है
    इन की धड़कन में बसना है, इन की साँसों में जीना है
    तू अपनी अदाएं बक्ष इन्हें, मैं अपनी वफ़ाएँ देता हूँ
    जो अपने लिए सोचीं थी कभी, वो सारी दुआएँ देता हूँ

    मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है
    हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है
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    Sahir Ludhianvi
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    हम अम्न चाहते हैं मगर ज़ुल्म के ख़िलाफ़
    गर जंग लाज़मी है तो फिर जंग ही सही
    Sahir Ludhianvi
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