हो सके तो तुम बचा लो अब भी देसी नस्ल को
    वर्ना पीछे सिर्फ़ ''शेवर'' मुर्ग़ियाँ रह जाएँगी
    Sarfaraz Shahid
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    इस दौर के मर्दों की जो की शक्ल-शुमारी
    साबित हुआ दुनिया में ख़्वातीन बहुत हैं
    Sarfaraz Shahid
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    फ़क़त रंग ही उन का काला नहीं है
    इसी क़िस्म की ख़ूबियाँ और भी हैं
    Sarfaraz Shahid
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    ईद पर मसरूर हैं दोनों मियाँ बीवी बहुत
    इक ख़रीदारी से पहले इक ख़रीदारी के ब'अद
    Sarfaraz Shahid
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    चेहरे चाँद सितारों वाले हेरा-फेरी करते हैं
    ये पैकर मटियारों वाले हेरा-फेरी करते हैं

    इन में घू
    में राशी अफ़सर या स्मगलर पाउडर के
    अक्सर लंबी कारों वाले हेरा-फेरी करते हैं

    ख़बरों में स्कैंडल हैं तस्वीरों में उर्यानी है
    यारो कुछ अख़बारों वाले हेरा-फेरी करते हैं

    इन पर फूल निछावर करने वाली जनता क्या जाने
    अक्सर लीडर हारों वाले हेरा-फेरी करते हैं

    'शाहिद'-साहिब कहलाते हैं मिस्टर भी मौलाना भी
    हज़रत दो किरदारों वाले हेरा-फेरी करते हैं
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    Sarfaraz Shahid
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    इश्क़ में कुछ इस सबब से भी है आसानी मुझे
    क़ल्ब सहराई मिला है आँख बारानी मुझे

    मेरे और मेरे चचा के दौर में ये फ़र्क़ है
    उन को तो बीवी मिली थी और उस्तानी मुझे

    एक ही मिसरे में दस दस बार दिल बिरयाँ हुआ
    वो ग़ज़ल में बाँध कर देते हैं बिरयानी मुझे

    कोका-कोला कर गई मुझ को क़लंदर की ये बात
    रेल के डब्बे में क्यूँँ मिलता नहीं पानी मुझे

    ज़ख़्म वो दिल पर लगाते हैं मिरे और उस पे रोज़
    अपने घर से भेज देते हैं नमक-दानी मुझे

    सारे शिकवे दूर हो जाएँ जो क़ुदरत सौंप दे
    मेरी दानाई तुझे और तेरी नादानी मुझे

    फूँक देता हूँ मैं उस पर अपना कोई शेर-ए-ख़ुश
    जब डराता है कोई अंदोह-ए-पिन्हानी मुझे
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    Sarfaraz Shahid
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    बढ़ती रही हर साल जो तादाद हमारी
    क्या याद करेगी हमें औलाद हमारी

    डिस्को के मुग़न्नी की झलक देख के मजनूँ
    चीख़ा कि मदद कीजिए उस्ताद हमारी

    मशरिक़ से तअल्लुक़ है न मग़रिब से कनेक्शन
    फ़ैशन ने हिला डाली है बुनियाद हमारी

    शीरीं को बना रक्खा है दफ़्तर का स्टेनो
    तक़लीद करेगा कोई फ़रहाद हमारी

    हम ने तो उन्हें जामिआ से नक़्द ख़रीदा
    फिर किस तरह जाली हुईं अस्नाद हमारी

    जिस रोज़ से मेम्बर वो कमेटी का हुआ है
    सुनता नहीं रूदाद करम-दाद हमारी

    जिस वक़्त भी वो आलमी नैट ऑन करेगा
    ईमेल दिला देगी उसे याद हमारी
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    Sarfaraz Shahid
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    वही मक़्बूल लीडर और डिप्लोमैट होता है
    जो मुँह से दिस कहे तो उस का मतलब दैट होता है

    अवामुन्नास को ऐसे दबोचा है गिरानी ने
    कि जैसे कैट के पंजे में कोई रैट होता है

    फ़राग़त ही नहीं मिलती बड़े-साहिब को मीटिंग से
    वो मीटिंग जिस का एजंडा फ़क़त चुप-चैट होता है

    क्रिकेटर बाज़ इस अंदाज़ से छका लगाते हैं
    ज़मीन पर गेंद होती है फ़ज़ा में बैट होता है

    यक़ीनन हो गया है माडर्न अपना घराना भी
    जहाँ पर कैप होती थी वहाँ अब हैट होता है

    यही देखा है 'शाहिद' तीसरी दुनिया के मुल्कों में
    कि अक्सर क़ौम पतली और लीडर फैट होता है
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    Sarfaraz Shahid
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    स्पैशलिस्ट पेन-किलर दे तो कौन सा?
    ''सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है''
    Sarfaraz Shahid
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    लबों में आ के क़ुल्फ़ी हो गए अश'आर सर्दी में
    ग़ज़ल कहना भी अब तो हो गया दुश्वार सर्दी में
    Sarfaraz Shahid
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