Sarvjeet Singh

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    कितनी हिम्मत कर के उस को फ़ोन मिलाया था
    फूटी क़िस्मत मेरी उस ने फ़ोन उठाया नईं
    Sarvjeet Singh
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    फिर किसी को भूलने की कोशिशों में
    फिर किसी को याद करने लग गए हैं
    Sarvjeet Singh
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    आज सारे ग़म भुला कर एक लड़की हँस रही है
    साथ में सब को हँसा कर एक लड़की हँस रही है

    क्या पता फिर कब मिले मौका उसे यूँँ देखने का
    बोल दो सब को बुला कर एक लड़की हँस रही है

    हो गया है एक अर्सा ही उसे आए हुए भी
    अब न मेरे घर पे आ कर एक लड़की हँस रही है

    कुछ पलों के ही लिए पर भूल कर इस ज़िन्दगी को
    छत पे आ कर खिलखिला कर एक लड़की हँस रही है

    आए इक मैसेज को पढ़ने वो दौड़ी सी गई है
    कमरे में यूँँ छुप-छुपा कर एक लड़की हँस रही है

    आख़िरश वो हँस रही है ख़ुश रहूँगा सोच कर ये
    चाहे मुझ को ही रुला कर एक लड़की हँस रही है
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    Sarvjeet Singh
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    कभी इस की क़सम खाओ कभी उस की क़सम खाओ
    नहीं तुम झूठ कहते हो चलो मेरी क़सम खाओ

    वफ़ा को मापने का इक अलग उस का है पैमाना
    तुम्हें मुझ सेे मुहब्बत है अगर सच्ची,क़सम खाओ

    उसे विश्वास ही होता नहीं चाहे मैं जो कह लूँ
    क़सम खाओ अगर बोला है तो जल्दी क़सम खाओ

    मुझे मालूम है तुम कल किसी के साथ थे फिर से
    अगर ऐसा नहीं है तो मिरे सर की क़सम खाओ

    किसी भी झूठ को तुम सच बना सकते नहीं,चाहे
    किसी पोथी पे रख के हाथ जो मर्ज़ी क़सम खाओ

    ये कलयुग है मिरे प्यारे यहाँ सब कुछ ही चलता है
    यहाँ कोई नहीं मरता कि तुम झूटी क़सम खाओ
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    Sarvjeet Singh
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    क्या ग़लत और क्या सही
    बात तो बस है वही

    जो न तुम ने थी सुनी
    जो न हम ने थी कही
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    Sarvjeet Singh
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    मैं अच्छा इंसान नहीं हूँ
    हाँ लेकिन हैवान नहीं हूँ

    बस मतले से बूझ सको तुम
    इतना भी आसान नहीं हूँ

    जिस को तू भर देगा आके
    मैं वो ख़ाली स्थान नहीं हूँ

    तू है मेरी जान,भला फिर
    मैं क्यूँ तेरी जान नहीं हूँ

    देख ज़रा कितना हँसता हूँ
    मैं बिल्कुल परिशान नहीं हूँ

    फिर से आ जाऊ बातों में
    मैं इतना नादान नहीं हूँ

    तुझ को भी मैं जान चुका हूँ
    ख़ुदस भी अंजान नहीं हूँ

    यूँँ ऐसे दस्तक ना दे अब
    बस तू ऐसा मान नहीं हूँ
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    Sarvjeet Singh
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    मैं अच्छा इंसान नहीं हूँ
    हाँ लेकिन हैवान नहीं हूँ

    बस मतले से बूझ सको तुम
    इतना भी आसान नहीं हूँ
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    Sarvjeet Singh
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    अच्छा तुम इक बात बताओ, सच कहना
    किस के सह थे रात बताओ, सच कहना

    ना मुझ को तुम पे बिल्कुल विश्वास नहीं
    सर पे रख के हात बताओ, सच कहना

    मेरी हालत जान भला क्या करना है?
    तुम अपने हालात बताओ, सच कहना

    अब भी मेरी याद तुम्हें आती है क्या?
    कुछ दिल के जज़्बात बताओ, सच कहना

    अब किस की यादों के घन आँखों में हैं?
    क्यूँ इतनी बरसात बताओ, सच कहना

    मुझ सेे ज़्यादा ध्यान तिरा रखता है वो?
    ख़ुश हो उस के साथ बताओ, सच कहना
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    Sarvjeet Singh
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    क्या डरें हम भूत-डायन-सी किसी भी बद-बला से
    आदमी से ही नहीं महफ़ूज़ है जब आदमी अब
    Sarvjeet Singh
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    जिस को ग़ुस्सा लग जाता है छोटी-छोटी बातों का
    उस सेे क्या वा'दा लेना अब लंबे-लंबे साथों का
    Sarvjeet Singh
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