Shaad Imran

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    हमारी ज़िंदगी में क्या नया है
    वही होता है जो, वो हो रहा है

    ज़रा दुनिया का अपनी हाल देखो
    ज़रा सोचो कोई सच-मुच ख़ुदा है?
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    उस को अपने पास बिठा लेने से ही
    धड़कन तेज़ और साँसें भारी होती है

    'शाद' तू सब कुछ बढ़ा चढ़ा के कहता है
    कौन सी लड़की इतनी प्यारी होती है?
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    ऐसा नहीं कि मैं ने मोहब्बत नहीं करी
    इज़हार करने ही कि बस हिम्मत नहीं करी
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    आजकल हम जफ़ा पे लिखते हैं
    या'नी तेरी अदा पे‌ लिखते हैं
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    मेरे हाथों में अपना हाथ रख कर
    कहा उस ने कभी ये हाथ तो न छोड़ोगे
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    आरज़ू दीद-ए-ख़ुदा की है
    आरज़ू भी हमनें क्या की है

    तुझ को देखें तो होश ही न रहे
    अदाएँ इस क़दर बला की है

    किसी सूरत तुझे अपना बना ले
    बात लेकिन तेरी रज़ा की है

    तुम ने जिस से भी की बे-वफ़ाई की
    हम ने जिस से भी की वफ़ा की है

    शा'इरी होगी उसी शख़्स से "शाद"
    ज़िन्दगी जिस ने भी तबाह की है
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    बात उस की कोई न टाली जाए
    सोचता हूँ नई पटा ली जाए

    देख कर उस को ये आया ख़याल
    अपने सर पर ये बला ली जाए

    अकेलेपन में और क्या कीजे
    वैसी पिक्चर ही चला ली जाए

    अब उस की याद आने वाली है
    अब इक सिगरेट जला ली जाए
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    उस के इश्क़ में बाल बढ़ाने वालों सुन लो
    उस के घर वाले तो पैसा देखेंगे
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    मैं न अच्छा न बुरा निकला
    मुझ सेे हर शख़्स क्यूँँ ख़फ़ा निकला

    रहा भलाई का ज़माना नहीं
    यही हर बार तजुर्बा निकला

    जिस को देखा नहीं किसी ने कभी
    ये ग़ज़ब है कि वो ख़ुदा निकला

    चाहने वालों में तेरे सब सेे अव्वल
    मेरा ही नाम हर दफ़ा निकला

    देख कर होश खो बैठी यशोदा
    लाल के मुँह में कहकशाॅं निकला

    'शाद' तेरा इश्क़ एक तरफ़ा था
    फिर क्यूँँ कहना वो बे-वफ़ा निकला
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    दर्द-ए-दिल की दवा नहीं होती
    इश्क़ में इल्तिजा नहीं होती

    बना देने से डर जहन्नुम का
    बंदगी या ख़ुदा नहीं होती

    ज़िन्दगी बे-वफ़ा ही होती है
    मौत पर बे-वफ़ा नहीं होती

    कुछ तो गुज़री है तेरे दिल पे 'शाद'
    शा'इरी बेवजह नहीं होती
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