इतने दुख से भरी है ये दुनिया
    आँख खुलते ही आँख भर आए
    shampa andaliib
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    तेरे पहलू से उठ के जाऊँ तो
    मुझ को दुनिया उदास करती है
    shampa andaliib
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    बेवफ़ाओं से है उमीद-ए-वफ़ा
    वहम का टूटना ही बेहतर है
    shampa andaliib
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    मेरे दिल में भी घर कर गई ख़ामोशी
    उस ने भी कुछ यार तवज्जोह कम कर दी
    shampa andaliib
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    वो अब हम सेे दूरी बनाने लगे हैं
    रक़ीबों की महफ़िल सजाने लगे हैं

    ये शिकवे शिकायत करें भी तो किस से
    सितम मेहरबाँ हम पे ढाने लगे हैं
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    shampa andaliib
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    बहुत से ख़ास रिश्तों में दरारें पड़ चुकी हैं अब
    हमारी सादगी दुश्मन हमारी बन गई यारों
    shampa andaliib
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    और उम्मीद क्या रखूँ तुझ से
    एक रिश्ता निभा नहीं पाया
    shampa andaliib
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    ऐ इश्क़ बे-मिसाल तू होगा जिसे भी हो
    मेरी नज़र में आज से तू जाल-साज़ है
    shampa andaliib
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    अधूरी ख़्वाहिशें जीने न देंगी
    मगर हर हाल में जीना पड़ेगा
    shampa andaliib
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    अपनी आँखों पे बाँध कर पट्टी
    तेरी गलियों में रक़्स करती हूँ
    shampa andaliib
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