Shariq Kaifi

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    तुम से बढ़कर कौन दुनिया में मेरे नज़दीक है
    इक तुम्हीं तो हो कि जिस का दिल दुखा सकता हूँ मैं
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    जिस्म आया किसी के हिस्से में
    दिल किसी और की अमानत है
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    साल के आख़िरी दिन उस ने दिया वक़्त हमें
    अब तो ये साल कई साल नहीं गुज़रेगा
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    आइने का साथ प्यारा था कभी
    एक चेहरे पर गुज़ारा था कभी

    आज सब कहते हैं जिस को नाख़ुदा
    हम ने उस को पार उतारा था कभी

    ये मिरे घर की फ़ज़ा को क्या हुआ
    कब यहाँ मेरा तुम्हारा था कभी

    था मगर सब कुछ न था दरिया के पार
    इस किनारे भी किनारा था कभी

    कैसे टुकड़ों में उसे कर लूँ क़ुबूल
    जो मिरा सारे का सारा था कभी

    आज कितने ग़म हैं रोने के लिए
    इक तिरे दुख का सहारा था कभी

    जुस्तुजू इतनी भी बे-मा'नी न थी
    मंज़िलों ने भी पुकारा था कभी

    ये नए गुमराह क्या जानें मुझे
    मैं सफ़र का इस्तिआ'रा था कभी
    इश्क़ के क़िस्से न छेड़ो दोस्तो
    मैं इसी मैदाँ में हारा था कभी
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    मना लिया है उसे फिर उसी की शर्तों पर
    तमाम उम्र किसे रूठने की फ़ुर्सत थी
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    रोना हो आसान हमारा
    इतना कर नुक़्सान हमारा

    बात नहीं करनी तो मत कर
    चेहरा तो पहचान हमारा
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    सफ़र हालाँकि तेरे साथ अच्छा चल रहा है
    बराबर से मगर एक और रास्ता चल रहा है
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    तेरे ही लिए आएँगे तेरे पास
    किसी से बिछड़ कर नहीं आएँगे

    बुरा मानिए तो बुरा मानिए
    इजाज़त तो ले कर नहीं आएँगे
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    हमीं तक रह गया क़िस्सा हमारा
    किसी ने ख़त नहीं खोला हमारा

    पढ़ाई चल रही है ज़िंदगी की
    अभी उतरा नहीं बस्ता हमारा

    मुआ'फ़ी और इतनी सी ख़ता पर
    सज़ा से काम चल जाता हमारा

    किसी को फिर भी महँगे लग रहे थे
    फ़क़त साँसों का ख़र्चा था हमारा

    यहीं तक इस शिकायत को न समझो
    ख़ुदा तक जाएगा झगड़ा हमारा

    तरफ़-दारी नहीं कर पाए दिल की
    अकेला पड़ गया बंदा हमारा

    तआ'रुफ़ क्या करा आए किसी से
    उसी के साथ है साया हमारा

    नहीं थे जश्न-ए-याद-ए-यार में हम
    सो घर पर आ गया हिस्सा हमारा

    हमें भी चाहिए तन्हाई 'शारिक़'
    समझता ही नहीं साया हमारा
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    "नज़्म"

    इक बरस और कट गया 'शारिक़'
    रोज़ साँसों की जंग लड़ते हुए
    सब को अपने ख़िलाफ़ करते हुए
    यार को भूलने से डरते हुए
    और सब से बड़ा कमाल है ये
    साँसें लेने से दिल नहीं भरता
    अब भी मरने को जी नहीं करता
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