ज़िंदगी जिस दिन मिरी तू जान लेता
    बात मेरी तू उसी दिन मान लेता

    डूबते आख़िर नहीं वो सब हमारे
    तब अगर गहराई मेरी जान लेता
    Read Full
    Shivam Raahi Badayuni
    1 Like
    उदासी जिस तरह देखी बदन में है उसे कहना
    कहीं मर ही न जाए हम घुटन में है उसे कहना

    हमारे लोग जो घर तक बचा पाए नहीं अपना
    गए मिट आग की ऐसी जलन में है उसे कहना
    Read Full
    Shivam Raahi Badayuni
    1 Like
    आँसू बचा नहीं मिला
    घर था मिरा नहीं मिला


    कैसे नहीं बताता अब

    हमदम चुना नहीं मिला
    जा कर चला गया कहीं

    साथी निभा नहीं मिला
    देखो हमें यहाँ नहीं

    मरहम लगा नहीं मिला
    उम्मीद कोई थी नहीं

    दिल था बना नहीं मिला
    उन को पता नहीं चला

    जंगल लुटा नहीं मिला
    रोता रहा कहीं तलक

    दिल भी खुला नहीं मिला
    अब कोई भी नहीं यहाँ

    मुझ सा ख़फ़ा नहीं मिला
    Read Full
    Shivam Raahi Badayuni
    1 Like
    बिना उस के कभी अपना गुज़ारा हो नहीं सकता
    मगर वो शख़्स कैसे भी हमारा हो नहीं सकता

    मिरा ही आसमाँ मुझ पे गिरा कर मुझ सेे कहते हैं
    तिरी दुनिया तिरा कोई सितारा हो नहीं सकता

    तुझे तो मान कर अपना लगाया था गले अपने
    गला ही काट बैठा तू सहारा हो नहीं सकता

    मुझे मालूम है आगे नहीं है रास्ता कोई
    जहाँ पर चल रही हो तुम किनारा हो नहीं सकता

    हमें आख़िर ग़म-ए-दिल का अभी भी दर्द होता है
    कभी भी रंज हम सेे अब दुबारा हो नहीं सकता
    Read Full
    Shivam Raahi Badayuni
    3 Likes
    सभी ज़ख़्म उन के छुपाते रहेंगे
    यही ग़म हमें अब सताते रहेंगे

    भरे ज़ख़्म कहते रहें चीख़ कर के
    इन्हें फूल कब तक बताते रहेंगे

    हमें ज़िंदगी से शिकायत नहीं है
    यही बात ख़ुद को सुनाते रहेंगे

    मिरे पास कुछ भी बचा ही नहीं है
    बचे ख़्वाब तेरे जलाते रहेंगे
    Read Full
    Shivam Raahi Badayuni
    1 Like
    हर शख़्स पर चेहरे मुझे दिखने लगे
    हर शख़्स अब ठहरे मुझे दिखने लगे

    भरते नहीं हैं ज़ख़्म मरहम भी लगा
    हैं ज़ख़्म सब गहरे मुझे दिखने लगे

    उम्मीद भर कोई नज़र आता नहीं
    हैं हर जगह पहरे मुझे दिखने लगे

    मुझ को कहा था कल किसी ने मौत है
    दरिया सभी गहरे मुझे दिखने लगे
    Read Full
    Shivam Raahi Badayuni
    1 Like
    अब ख़ुद को रौशन करना है
    पतझड़ को सावन करना है

    आँखों से बहते दरिया को
    गंगा सा पावन करना है
    Read Full
    Shivam Raahi Badayuni
    3 Likes
    दिल ही दिल अपना रोता है
    जब तन्हाई में सोता है

    कैसे कोई जीता होगा
    जब वो अपने को खोता है
    Read Full
    Shivam Raahi Badayuni
    4 Likes
    मेरी रातें मुझ को सोने को कहती है
    उस की यादें मुझ को खोने को कहती हैं
    Shivam Raahi Badayuni
    3 Likes
    अब हम कभी तुम को बुलाएँगे नहीं
    दिल जो दुखा तुम को बताएँगे नहीं
    Shivam Raahi Badayuni
    3 Likes

Top 10 of Similar Writers