ख़ुश कहाँ हैं उस ख़ुदा की अब इबादत करने वाले
हँस रहे हैं बे-वजह तुम सेे मोहब्बत करने वाले
क्या बचा कर ज़िंदगी को जीत लेंगे हम उसे भी
ना-समझ हैं ज़िंदगी की ये हिफ़ाज़त करने वाले
किस तरह से चल रहा है चाल वे अपनी ये देखो
क्या अजब हैं लोग वो जो हैं शराफ़त करने वाले
हैं बहुत से दर्द शिकवे ग़म परेशानी यहाँ पर
रूठ कर बैठे हुए हैं ख़ुद इनायत करने वाले
तुम गले मिलना किसी से तो ज़रा बच के ही मिलना
पास रहते हैं तिरे सारे बग़ावत करने वाले
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