मोहब्बत ने कभी हम को कहीं तन्हा नहीं छोड़ा
सो इक तस्वीर ने मेरा अभी बटुआ नहीं छोड़ा
बड़े नोटों के आने जाने का क्या ही भरोसा है
सही तो है कि हम ने भी कभी सिक्का नहीं छोड़ा
चले थे छोड़ कर घर बार हम तन्हा बिताने दिन
मगर इक दिल की चाहत ने मिरा पीछा नहीं छोड़ा
है सीखा हमनें जीना ज़िन्दगी, हालात से जुड़कर
वगरना हम ने ऐसे तो कभी का'बा नहीं छोड़ा
तुम्हीं शब भर रहे मुझ
में भटकते ख़्वाब की सूरत
बताये क्या कि क्यूँ हम ने तिरा सजदा नहीं छोड़ा
किसे है बैर साहिल के नजारों से, मगर दिल ने
कभी भी दश्त में तूफान से लड़ना नहीं छोड़ा
वजू करने चले थे हम गुनाहों को जब दरिया में
तो हम ने एक भी फिर मुल्क में दरिया नहीं छोड़ा
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