Devansh gupta

Top 10 of Devansh gupta

    तुम मुझ को इतना दीवाना मत समझो मेरी जानाँ
    मैं कोई ताज नहीं बनवाने वाला तेरे ख़ातिर
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    मिल कर जो तू ने मुझ सेे मुझ को है जो बदनाम किया
    ऐसा कर के तू ने ख़ुद से ख़ुद का है नुक़सान किया
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    कल तक मैं जो सब कहता था
    वो क़िस्मत ने आज दिया है
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    तुम आज फ़ितूर समझ कर रख लो मुझ को
    मैं कल नूर बिखेरूँगा तेरे ख़ातिर
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    वक़्त लेते आना
    उन सेे कहना आना तो बस वक़्त लेते आना
    कुछ चुस्कियां चाय की संग लेते जाना

    थोड़ी गपशप के साथ कुछ यादें बनाना
    लेकिन आना तो बस वक़्त लेते आना

    कुछ पल रुकना कुछ पल ठहरना
    कुछ पुरानी यादों को फिर से बनाना

    एक पल के लिए ही सही वो यादें लेते आना
    लेकिन जब आना तो बस वक़्त लेते आना
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    कानों में झुमके माथे में बिंदिया आँखों में काजल
    कुछ इतना ही देखा था मैं ने बस उस के चेहरे में
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    कहते है जंग , जुआ और इक मोहब्बत
    ये तीन बस तबाही देकर जाती है
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    "मुकम्मल इश्क़"
    मुकम्मल इश्क़ मेरा मेरे बा'द किसी ग़ैर का ना रहा
    सब सज्दे मुकम्मल हुए बस तेरा आना विफल रहा

    तेरी नुमाइश पसंद आँखों का बढ़ा यहाँ पहरा रहा
    तुझे हर नज़र से बचाने को मैं तेरे साथ ठहरा रहा

    तुझे स्याही मानकर मैं अपनी किताब लिखता रहा
    तुझे उस
    में पाकर मैं उसे ज़िंदगी भर पढ़ता रहा

    तुझे इन्हीं लफ़्ज़ों से ताज का मुमताज़ बनाता रहा
    अपनी हर कहानी में हीर से राँझे को दूर कराता रहा

    तू बस इंतिज़ार कर, मैं ख़ुद को यही समझाता रहा
    तू बस ठहराव निकली वक़्त का, जो गुज़र जाता रहा
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    इल्म नहीं है मुझ को मेरी चाहत का
    तब ही लोग मुझे दीवाना नईं कहते
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    माना ज़र्रा ज़र्रा टूटा हूँ उस की यादों में मैं
    कोई केवल आशिक़ बोले मुझ को ये मंज़ूर नहीं
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