Dileep Kumar

Top 10 of Dileep Kumar

    वक़्त के साथ सब कुछ बदल जाता है
    उस का इस झूठ से काम चल जाता है
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    तू कभी मुझ सेे मिला तस्वीर मेरी
    देख फिर कोई जुदा तस्वीर मेरी

    इक बनानी थी उसे ग़मगीन सूरत
    वो बनाता ही गया तस्वीर मेरी
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    जैसा मैं ने चाहा था वैसा नहीं था
    बातें फिर भी ठीक थी लहजा नहीं था
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    बोती थी पहले नफ़रत सियासत मगर
    अब ये भी काम अख़बार कर देता है
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    जिस किसी से तेरा चक्कर चल रहा था
    उस को मैं अच्छी तरह से जानता था

    रातें रौशन थी किसी की तुझ सेे दिलबर
    तो किसी का तेरे बा'इस रत-जगा था
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    दूर साए से मेरे कहीं रहती हो
    या'नी इस शहर में अब नहीं रहती हो

    लौट आया हूँ इक दोस्त के घर से मैं
    जब ये देखा कि तुम भी वहीं रहती हो
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    यूँँ तो वो शख़्स बिल्कुल बे-गुनह है
    ज़माने की मगर उस पे निगह है

    हमारे दरमियाँ जो दूरियाँ हैं
    यक़ीनन तीसरी कोई वजह है
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    अपना ही एक मौसम लिए फिरते हैं
    लोग जो दिल को पुर-ग़म लिए फिरते हैं

    चारा-गर जैसे हैं ये सुख़न-वर सभी
    सबके ज़ख़्मों का मरहम लिए फिरते हैं
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    ख़्वाब ऐसा जो मुकम्मल भी, नहीं भी
    इश्क़ में वो मेरे पागल भी, नहीं भी

    ज़िंदगी गर इम्तिहाँ लेती रहेगी
    इम्तिहाँ होंगे मुसलसल भी, नहीं भी
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    बेटा ज़रा सा जो कमाने लग गया
    फिर बाप से दूरी बनाने लग गया
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