Dileep Kumar

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Dileep Kumar 'Masruur' shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Dileep Kumar 'Masruur''s shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
मोहब्बत भले ही ज़ियादा नहीं है
बिछड़ने का कोई इरादा नहीं है
Dileep Kumar
ख़ुद ही अपनी हौसला-अफ़ज़ाई की
इतनी आदत पड़ गई तन्हाई की

शाने पे सर रख के रोई किस के तुम
कौन था जिस ने मिरी भरपाई की
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Dileep Kumar
वक़्त के साथ सब कुछ बदल जाता है
उस का इस झूठ से काम चल जाता है
Dileep Kumar
हम लोग हाल-ए-ज़ार के मारे हुए
छत पर खड़े हैं अब थके-हारे हुए
Dileep Kumar
हम अगर बदला लेने पे आ जाएँ तो
ज़िंदगी हाथ मलती ही रह जाएगी
Dileep Kumar
ये नहीं कि बा'द में आई है
ये उदासी मुझ में अज़ल से है
Dileep Kumar
ज़्यादा अच्छे होने का ये नुक़सान है
धीरे धीरे हम-ज़बानी आ जाती है
Dileep Kumar
वो दुनिया से बिल्कुल जुदा देखते हैं
जो कम-ज़र्फ़ में हौसला देखते हैं
Dileep Kumar
जाने वाले, तू शायद नहीं जानता
बिगड़ा है तेरे जाने से क्या क्या यहाँ
Dileep Kumar
तू कभी मुझ सेे मिला तस्वीर मेरी
देख फिर कोई जुदा तस्वीर मेरी

इक बनानी थी उसे ग़मगीन सूरत
वो बनाता ही गया तस्वीर मेरी
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Dileep Kumar
क्या सितम है तुम पे ग़ज़लें लिख रहें हैं
हम को ये दुख तो कभी लिखना नहीं था
Dileep Kumar
जैसा मैं ने चाहा था वैसा नहीं था
बातें फिर भी ठीक थी लहजा नहीं था
Dileep Kumar
बोती थी पहले नफ़रत सियासत मगर
अब ये भी काम अख़बार कर देता है
Dileep Kumar
जिस किसी से तेरा चक्कर चल रहा था
उस को मैं अच्छी तरह से जानता था

रातें रौशन थी किसी की तुझ सेे दिलबर
तो किसी का तेरे बा'इस रत-जगा था
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Dileep Kumar
दूर साए से मेरे कहीं रहती हो
या'नी इस शहर में अब नहीं रहती हो

लौट आया हूँ इक दोस्त के घर से मैं
जब ये देखा कि तुम भी वहीं रहती हो
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Dileep Kumar
ये ज़माना भी इसी बा'इस तिरा है
झूठ भी सच की तरह तू बोलता है
Dileep Kumar
ग़ज़ल के क़ाफ़िए बदले, ग़ज़ल बदली
ग़ज़ल के फिर मआ'नी भी नए रक्खे
Dileep Kumar
एक तो दिल बहुत दुखा मेरा
और वो भी नहीं हुआ मेरा

टूटते, रोते देख के उस को
चेहरा ही फीका पड़ गया मेरा
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Dileep Kumar
यूँँ तो वो शख़्स बिल्कुल बे-गुनह है
ज़माने की मगर उस पे निगह है

हमारे दरमियाँ जो दूरियाँ हैं
यक़ीनन तीसरी कोई वजह है
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Dileep Kumar
मेरी निय्यत पे उसे शक हो गया है
कह दिया जो ख़ूब-सूरत उस को मैं ने
Dileep Kumar

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