Divu

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    नाराज़गी नफ़रत न बन जाए कहीं
    मुझ को तेरा महबूब समझेगा जहाँ
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    उम्र भर साथ रहने के वादे
    झूठे दावे वो करता है मुझ से
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    अचानक मैं कभी सब उलझनों से दूर हो जाऊँ
    हमेशा की तरह सोऊँ हमेशा को ही सो जाऊँ
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    दो दिन की कहानी में नायाब रहा हूँ मैं
    पागल सी किसी लड़की का ख़्वाब रहा हूँ मैं
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    जुस्तुजू में तेरी हर लम्हा रहा मैं
    शहर जो आया तेरे तन्हा रहा मैं
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    कहीं तो मैं किसी से सीख लेता रस्म दुनिया की
    मुहब्बत में मुहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं सोचा
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    तू क्यूँँ कर रहा है शिकायत अभी तक
    तुझे वो समझता अमानत अभी तक

    तू क्यूँँ मान बैठा उसे अपना दुश्मन
    दिखाई कहाँ है अदावत अभी तक

    इधर देख इल्ज़ाम का सिलसिला है
    उधर कर रहा वो इबादत अभी तक

    लिखा ख़ूब तुझ पे ग़लत कुछ न बोला
    बचा कर रखी है शराफ़त अभी तक

    किसी दर्द का अब असर तक नहीं है
    सितम को वो कहता बशारत अभी तक

    दिखा मुस्कुराता वो तेरे सितम पर
    निभा वो रहा है मुहब्बत अभी तक

    भुला दें तुम्हें ये नसीहत दी सब ने
    कहा फिर कहाँ है क़यामत अभी तक
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    तिरे रू-ब-रू मैं रहूँगा कभी तो
    वही ख़्वाब मैला जि
    यूँँगा कभी तो

    कहीं तेरी पायल कहीं चूड़ी होगी
    इन्हीं आहटों से जगूँगा कभी तो

    लिखी है ग़ज़ल सोच कर जो भी तुझ को
    तुम्हें देख कर मैं पढूँगा कभी तो

    उड़ी नींद मेरी मुसलसल कई दिन
    हिसाब-ए-तबीअत करूँँगा कभी तो

    रहा क्यूँँ मुयस्सर तिरी आह पर मैं
    सबब सारे सच-सच कहूँगा कभी तो

    कभी डाँट तेरी कभी प्यार हूँ मैं
    अभी है ख़लिश पास हूँगा कभी तो

    रखे सिर कभी बाज़ुओं पर तू थक कर
    सुकूँ से ख़ुदा नींद लूँगा कभी तो
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    हमेशा से सब की नज़र में रहा मैं
    दिखा पास तेरे ख़बर में रहा मैं

    मिला जो तुम्हें आँख में तेरी खोया
    चला जादू और फिर असर में रहा मैं

    ये ज़ुल्फ़ें बरसती घटा कोई जैसे
    लगा धूप में भी शजर में रहा मैं

    सबब क्या बताऊँ के क्यूँँ मुतमइन हूँ
    मिला जो मुझे तू ज़फ़र में रहा मैं

    किनारा किया इश्क़ से कर के तौबा
    भुला कर के उल्फ़त गुज़र में रहा मैं

    निगाहों से तेरी मिला हौसला है
    किया जो भी पहले मगर में रहा है

    भला हिज्र के क़िस्से कब तक लिखूँगा
    न जाने ख़ुदा किस कसर में रहा मैं

    ठहर लूँ यहीं अब यहीं इश्क़ लिख दूँ
    चला जो सफ़र में सफ़र में रहा मैं
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    तुम्हें मैं जिस तरह से खो रहा हूँ
    तुम्हें भी मुझ को अब खोना पड़ेगा

    कि कब तक जाँ तिरे आँसू बचेंगे
    तिरे आँखों को अब रोना पड़ेगा
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