Firdous khan

Top 10 of Firdous khan

    इस वतन में छोटी सी बुलबुल के हूँ मानिंद मैं
    मेरा मज़हब कुछ भी हो पर हूँ तो सारा हिंद मैं
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    मुझे तुम फूल देते हो मेरे किस काम के हैं ये
    है सुंदर पर महक इन
    में तुम्हारी तो नहीं आती
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    वो डर जाता है इक मासूम बच्चे की तरह बिल्कुल
    मैं जब भी ख़्वाब में उस को अकेला छोड़ जाती हूँ
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    साॅरी उस ने मुझे कहा है फिर
    या'नी अब कुछ तो हादसा है फिर
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    जलती उदास आँखों में पिघली नमी हूँ मैं
    या'नी के सूनी रातों में तेरी कमी हूँ मैं
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    सब फूल क्यूँ उदास थे ये क्या पता तुम्हें
    क़िस्मत तो है गुलाब की उस ने छुआ तुम्हें
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    सुनो जानाँ तुम्हारे लब पे मय का एक भी क़तरा
    मेरी आँखों की है तौहीन और नाकाबिल-ए-बर्दाश्त
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    आदमी तू बड़ी नेमत है इक औरत को मगर
    ज़िन्दगी जीने की ख़ातिर तेरी दरकार नहीं
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    कहा था ये उस ने है दलदल उदासी
    उसी से मिली फिर मुसलसल उदासी

    मोहब्बत की ख़ुशियाँ है उस के हवाले
    मेरे हिस्से आई मुक़म्मल उदासी

    तब्बसुम मेरे लब पे सिसकी है मेरी
    मेरी उजड़ी आँखों का काजल उदासी

    किया इश्क़ तो फिर कफ़ारा नहीं कुछ
    मोहब्बत के मारो का है हल उदासी
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    यूँँ तेरी राह तकते तकते सुन
    मेरी आँखों में पड़ गए जाले

    अब के बारिश कहीं मेरी छत से
    तेरा एहसास ही न धो डाले
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