Firdous khan

Firdous khan

@Firdouskhan21

Firdous khan shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Firdous khan's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
लाश बिस्तर से देखती है उसे
रूह लटकी हुई है पंखे पर
Firdous khan
ज़ेहन में शोर-शराबे अक्सर
दिल में सन्नाटे करते हैं
Firdous khan
इस वतन में छोटी सी बुलबुल के हूँ मानिंद मैं
मेरा मज़हब कुछ भी हो पर हूँ तो सारा हिंद मैं
Firdous khan
दूसरा पेड़ हरा रखने में मुरझाए ख़ुद
एक ही शख़्स जो इक रिश्ते में झुकता जाए

फूल हो जैसे कोई ऐसा है लहजा उस का
फूल भी ऐसा कि पत्थर में दरार आ जाए
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Firdous khan
कितना मुश्किल है ना हर साल सफ़र पर होना
संग-ए-मील आख़िरी बन जाना दिसम्बर होना
Firdous khan
मैं माँगू वक़्त नोटों सा तू चिल्लड़ सा थमा जाए
तेरी ख़ैरात में अपना गुज़ारा हो नहीं सकता
Firdous khan
हँसते हुए वो मुझ सेे जुदा कैसे हो गया
नुक़सान में किसी का नफ़ा कैसे हो गया

ख़ुश क़िस्मती पे अपनी मुझे शक सा होता था
इतना हसीन शख़्स मेरा कैसे हो गया
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Firdous khan
तुम्हारे क़दमों को जब चूमती हूँ लगता है ऐसा
कोई जोगन किसी दरगाह की चौखट को चू
में है
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Firdous khan
मुझे तुम फूल देते हो मेरे किस काम के हैं ये
है सुंदर पर महक इन
में तुम्हारी तो नहीं आती
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Firdous khan
वो डर जाता है इक मासूम बच्चे की तरह बिल्कुल
मैं जब भी ख़्वाब में उस को अकेला छोड़ जाती हूँ
Firdous khan
साॅरी उस ने मुझे कहा है फिर
या'नी अब कुछ तो हादसा है फिर
Firdous khan
जलती उदास आँखों में पिघली नमी हूँ मैं
या'नी के सूनी रातों में तेरी कमी हूँ मैं
Firdous khan
सब फूल क्यूँ उदास थे ये क्या पता तुम्हें
क़िस्मत तो है गुलाब की उस ने छुआ तुम्हें
Firdous khan
सुनो जानाँ तुम्हारे लब पे मय का एक भी क़तरा
मेरी आँखों की है तौहीन और नाकाबिल-ए-बर्दाश्त
Firdous khan
आदमी तू बड़ी नेमत है इक औरत को मगर
ज़िन्दगी जीने की ख़ातिर तेरी दरकार नहीं
Firdous khan
जले जाते है ये दीपक दिवाली में के जैसे मैं
जली जाती हूँ जब भी तुम दिवाली पर नहीं होते
Firdous khan
तुम्हारा फ़ोन ख़ुद काटूँ तो ये महसूस होता है
कि जैसे आख़िरी साँसों को गिनते ख़ुद-कुशी कर ली
Firdous khan
ज़ख़्म खाते खाते छोड़ा साथ दम ने माज़रत
इश्क़ करने की ख़ता कर ली थी हम ने माज़रत

सर पटक कर चीख़ता है दर्द मेरा हर घड़ी
देख मुझ को कह दिया है ख़ुद ही ग़म ने माज़रत
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Firdous khan
यूँँ तेरी राह तकते तकते सुन
मेरी आँखों में पड़ गए जाले

अब के बारिश कहीं मेरी छत से
तेरा एहसास ही न धो डाले
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Firdous khan
तुम्हारे लब नहीं उस को मय्यसर
समुंदर रोएगा बरसात बनकर
Firdous khan

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