तुम ने जिस घर को हिस्सों में बाँटा है
    बीस बरस लगते हैं इक बनवाने में
    Shriyansh Qaabiz
    3 Likes
    बरसों बा'द दिखा चहरा तो समझे हम
    कैसे इक तस्वीर पुरानी होती है
    Shriyansh Qaabiz
    5 Likes
    यहाँ सब लोग रोते ही मिले हैं
    कहानी इतनी अच्छी जा रही है
    Shriyansh Qaabiz
    1 Like
    हम मिल के आ गए मगर अच्छा नहीं लगा
    फिर यूँँ हुआ असर कि घर अच्छा नहीं लगा

    इक बार दिल में तुझ सेे जुदाई का डर बना
    फिर दूसरा कोई भी डर अच्छा नहीं लगा
    Read Full
    Shriyansh Qaabiz
    51 Likes
    घड़ी घर की ज़रा धीरे है चलती
    इसे मालूम है सजना तुम्हारा
    Shriyansh Qaabiz
    3 Likes
    तुम सेे बातें कर के ये तो जान गया
    तुम को खोने वाले सब पछताएँगे
    Shriyansh Qaabiz
    6 Likes
    मिरे किरदार का मरना ही शायद
    कहानी की ज़रूरत बन गया था
    Shriyansh Qaabiz
    1 Like
    कितना भी ज़ोर दूँ मगर आता नहीं है याद
    किस ने बताया था मुझे के खो गया हूँ मैं
    Shriyansh Qaabiz
    3 Likes
    फ़क़त हालत हमारी देख कर आँसू बहाते हो
    अरे बैठो अभी तुम को कहानी भी सुनाते हैं
    Shriyansh Qaabiz
    3 Likes
    इसी पर बैठ कर शब भर कहानी माँ सुनाती थी
    तभी ख़ुशबू सी आती है मुझे इस चारपाई से
    Shriyansh Qaabiz
    4 Likes

Top 10 of Similar Writers