इशारा है ख़ुदा का एक दूजे के लिए हैं हम
    दुपट्टा तेरा यूँँ नईं फँस रहा मेरी घड़ी में जान
    Kartik tripathi
    2 Likes
    जला कर राख कर दी मैं ने फिर तस्वीर लैला की
    उसे लगता था उस सेे ख़ूब-सूरत कोई है ही नइँ
    Kartik tripathi
    3 Likes
    उस को किसी और से शिकायत हो तो शिकवा भी करे
    बंदा परेशाँ जो अगर ख़ुद से हो तो क्या ही करे
    Kartik tripathi
    7 Likes
    वो लोग हम ही थे मुहब्बत में जो फिर आगे हुए
    वो लोग हम ही थे मियाँ जो दूर भागे जिस्म से
    Kartik tripathi
    7 Likes
    शौक़,लत,आवारगी,अय्याशी में गुज़री हमारी
    ज़िन्दगी अब तू मुनासिब सी सज़ा दे गिनती कर के
    Kartik tripathi
    7 Likes
    मैं समझता था सरल है ज़िन्दगी बस फ़िल्म जितनी
    डर गया मैं ज़िन्दगी की फिर हक़ीक़त को समझ कर

    ऐंठ से आया था बाज़ार-ए-मुहब्बत में कभी जो
    रह गया वो लड़का जानाँ ज़ुल्फ़ में तेरी उलझ कर
    Read Full
    Kartik tripathi
    6 Likes
    ऐंठ से आया था बाज़ार-ए-मोहब्बत में कभी जो
    रह गया वो लड़का जानाँ ज़ुल्फ़ में तेरी उलझ कर
    Kartik tripathi
    13 Likes
    यार तू भी मानता है हाथ की तहरीर में
    मैं समझता था कि हम दो जिस्म और इक जान है
    Kartik tripathi
    4 Likes
    रखा है प्यार हिस्से में परिंदों के
    'शजर' की नौकरी बस चोट खानी है
    Kartik tripathi
    3 Likes
    क़ातिल-ए-अमद को क्यूँँ दोष दे रहे हो तुम
    मेरे यार उस की तो शौक-ए-क़त्ल आदत है
    Kartik tripathi
    2 Likes

Top 10 of Similar Writers