Kartik tripathi

Kartik tripathi

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Kartik tripathi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Kartik tripathi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
जान-ए-तमन्ना हम ने तब तब तुम्हें पुकारा
रंग-ए-फ़लक से टूटा जब जब कोई सितारा
Kartik tripathi
हमें ता-उम्र न आया या-इलाही फ़न मुहब्बत का
किसी को ख़ूब रोए और किसी को फिर रुलाया ख़ूब
Kartik tripathi
किसी के वास्ते तेरी फ़क़त इक दीद है बख़्शिश
किसी के वास्ते मामूली सा बस इक बदन है तू
Kartik tripathi
लगाया है मुझे गले से उस ने जबसे बा-ख़ुदा
ये धूप मुझ को मौसम-ए-बहाराँ लगने लग गई
Kartik tripathi
लिख रहे थे पर्चा एग्जाम में सभी अपना
उस के झुमके पे अटकी रह गई मेरी आँखें
Kartik tripathi
साँस लेना भी हो जाता है उस जगह मुश्किल
हम ने साथ इक पल भी जिस जगह बिताया था
Kartik tripathi
इशारा है ख़ुदा का एक दूजे के लिए हैं हम
दुपट्टा तेरा यूँँ नईं फँस रहा मेरी घड़ी में जान
Kartik tripathi
जला कर राख कर दी मैं ने फिर तस्वीर लैला की
उसे लगता था उस सेे ख़ूब-सूरत कोई है ही नइँ
Kartik tripathi
उस को किसी और से शिकायत हो तो शिकवा भी करे
बंदा परेशाँ जो अगर ख़ुद से हो तो क्या ही करे
Kartik tripathi
इश्क़ तब तक ही बस पाक है
पैरहन में वो है जब तलक
Kartik tripathi
वो लोग हम ही थे मुहब्बत में जो फिर आगे हुए
वो लोग हम ही थे मियाँ जो दूर भागे जिस्म से
Kartik tripathi
शौक़,लत,आवारगी,अय्याशी में गुज़री हमारी
ज़िन्दगी अब तू मुनासिब सी सज़ा दे गिनती कर के
Kartik tripathi
हम ने उम्र भर सब रिश्तों को खूब गाली दी
पर न सोचा हम ने किस सेे वफ़ा निभाई थी
Kartik tripathi
दर्द क्या है मुझ को तुम सेे मैं कह नहीं पाया
हाथ थाम कर तुम ने भी कभी नहीं पूछा
Kartik tripathi
मैं समझता था सरल है ज़िन्दगी बस फ़िल्म जितनी
डर गया मैं ज़िन्दगी की फिर हक़ीक़त को समझ कर

ऐंठ से आया था बाज़ार-ए-मुहब्बत में कभी जो
रह गया वो लड़का जानाँ ज़ुल्फ़ में तेरी उलझ कर
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Kartik tripathi
ग़म की शब हिज्र-ए-माह मुबारक हो
हम को अब ये तनख़्वाह मुबारक हो

उस ने उस को रक्खा हम सेे पहले
सो शहज़ादी को शाह मुबारक हो
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ऐंठ से आया था बाज़ार-ए-मोहब्बत में कभी जो
रह गया वो लड़का जानाँ ज़ुल्फ़ में तेरी उलझ कर
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यार तू भी मानता है हाथ की तहरीर में
मैं समझता था कि हम दो जिस्म और इक जान है
Kartik tripathi
रखा है प्यार हिस्से में परिंदों के
'शजर' की नौकरी बस चोट खानी है
Kartik tripathi
वास्ते तेरे ही मैं कर रहा यहाँ सब कुछ
बैर फिर यूँँ कुछ तुझ सेे बात भी नहीं करनी
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