Manish Yadav

Top 10 of Manish Yadav

    मैं सोच के डर जाता हूँ वो तेरे मिरे ख़त
    हर शख़्स इन्हें पढ़ जो सर-ए-आम रहा हो
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    इशारा कोई तो कर दो कि वापस आ रहे हो तुम
    किसी के क़दमों की आहट मेरी जानिब को आती है
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    शौक़ से चलता क़ज़ा साथ अब तिरे मैं
    ज़िंदगी के कुछ उधार अब भी हैं बाक़ी
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    क्या कहा उस ने चू
    में तुम्हारे भी लब
    हाँ कहो तो ज़रा और क्या क्या हुआ
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    कि अबकी तुम करो मुझ सेे मुहब्बत
    तुम्हें मैं छोड़ जाना चाहता हूँ
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    रही होगी हवा की कुछ तो रंजिश
    चराग़ों को बुझा देती है आ कर

    कभी कर लूँ यहाँ पर मैं सुसाइड
    ये ख़ामोशी डरा देती है आ कर
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    कि अब मैं मुस्कुराना चाहता हूँ
    क़ज़ा के पास जाना चाहता हूँ

    मिरे दामन को कोई थाम ले अब
    मैं ज़ख़्मों को भुलाना चाहता हूँ

    बनाया घर गया मुझ सेे न कोई
    मैं सबका घर गिराना चाहता हूँ

    कि तुम सेे अब निभा सकता नहीं मैं
    ये बंधन तोड़ जाना चाहता हूँ
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    फिर हुआ है वही जिस का डर था मुझे
    अबकी बारिश जो आई तो घर ढह गया
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    हमें दिल को लगाना चाहिए था
    इसे भी आज़माना चाहिए था

    अकेले का नहीं था देख ज़िम्मा
    तुझे भी पास आना चाहिए था


    सबब होता नहीं है शाद का यूँँ

    हमें कोई बहाना चाहिए था
    हुई क्या थी ख़ता मेरी तरफ़ से

    हक़ीक़त को बताना चाहिए था
    ख़ुशी के क़त्ल के बाबत उदासी

    तुझे भी जेल जाना चाहिए था
    बहक जाते मगर हम भी यहाँ पर

    ज़रा मौसम सुहाना चाहिए था
    किताबों की तहों के बीच सूखे

    गुलाबों को दिखाना चाहिए था
    किनारे बैठ कर अब सोचना क्या

    हमें तो डूब जाना चाहिए था
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    जब कभी ख़्वाब आँख में आए
    यूँँ लगा मह-जबीं वही आया
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