Manoj Devdutt

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    ख़ूब-सूरत प्यार की ही ये कहानी है बस
    ताज दुनिया में मोहब्बत की निशानी है बस

    मक़बरा तो मक़बरा ही मान लो तुम इस को
    क़ब्र है मुमताज़ की अब तो बचानी है बस
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    घड़ी से सूई अब निकाली है
    मनाई इस तरह दिवाली है
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    सूखे शजरों की कहानी सुनो
    ख़ुद उन्हीं की ही जुबानी सुनो

    हम सुख़न-वर अब बहुत कम कहें
    जब कहें तो तुम रवानी सुनो

    नदियों की ही ये कहानी कहे
    तुम कभी जो बहता पानी सुनो

    जब शिकायत माँ की बेटे ने की
    कुछ हमारी भी तो नानी सुनो

    ठीक अब इतना ग़ुरूर है नहीं
    इस जहाँ में सब है फ़ानी सुनो

    अब तुम्हारे पास होंगे कई
    पर नहीं है मेरा सानी सुनो
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    Manoj Devdutt
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    शहर में पैदा ख़राबी हो गई है
    नस्ल ये पूरी शराबी हो गई है

    बाप ने जीवन गुज़ारा मुफ़्लिसी में
    नस्ल पर उस की नवाबी हो गई है
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    Manoj Devdutt
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    आदतें जब ख़राब होने लगी
    हाथ में फिर शराब होने लगी

    सिर्फ़ तुझ सेे हुई मोहब्बत हमें
    और फिर बे-हिसाब होने लगी

    दुनिया में ठीक था शुरू में सभी
    दुनिया अब बे-नकाब होने लगी

    ज़िन्दगी में बची नहीं रौशनी
    फिर माँ इक आफ़ताब होने लगी

    बोलना हर दफ़ा मुनासिब नहीं
    कामयाबी जबाब होने लगी

    की मोहब्बत मनोज ने जिस सेे अब
    याद उस की अज़ाब होने लगी
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    पहली‌ दफ़ा मुझ को हुआ था जो
    वो आख़िरी ही इश्क़ था‌ मेरा
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    नाचना जो पसंद था मुझ को
    ज़िन्दगी फिर नचा रही है मुझे
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    अब मैं किसी के हाथ में आता नहीं
    इक हाथ से बस मैं निकल पाता नहीं

    वो कह चुकी है तुम चले जाओ कहीं
    वो शर्म हूँ मैं जो कहीं जाता नहीं

    सूरत दिखा दी है उसी ने अब मुझे
    चेहरा तभी कोई मुझे भाता नहीं

    टूटा नहीं है दिल मेरा बस इस लिए
    ग़ज़लें तरन्नुम में अभी गाता नहीं

    मैं हो गया हूँ अब मुलाज़िम उस का ही
    मेरा किसी से अब कोई नाता नहीं

    बारिश कभी भी हो उसे है भीगना
    छतरी लगा दूँ तो कहे छाता नहीं

    पहला निवाला वो न खा ले जब तलक
    खाना कभी मैं तब तलक खाता नहीं
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    Manoj Devdutt
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    घर से निकलता ही नहीं हूँ मैं
    घर भी कभी निकला नहीं मुझ सेे
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    मौसम अभी खुला नहीं है ये
    शायद अभी भी सो रही है वो
    Manoj Devdutt
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