मुझ को ये नज़र आया के वो एक बला है
    कुछ ख़्वाब है कुछ अस्ल है कुछ तर्ज -ए- अदा है

    वो ग़ैर की आग़ोश में रहने लगा शादाँ
    उस को नहीं मालूम के दिल मेरा जला है
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    Navneet krishna
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    तेरी बातों में हम रह गए
    ख़ुदस ग़ाफ़िल सनम रह गए

    उन को दुनिया की सब राहतें
    मेरे हिस्से में ग़म रह गए
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    Navneet krishna
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    एक क़िस्सा वफ़ा का सुना दीजिए
    दर्द-ए-दिल को ज़रा अब बढ़ा दीजिए

    मेरे अल्ला कब तक शब-ए-हिज्र ये
    मुझ को महबूब से फिर मिला दीजिए
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    Navneet krishna
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    ज़ख़्मों पे ज़ख़्म खाए ज़माने गुज़र गए
    पत्थर भी घर में आए ज़माने गुज़र गए

    मेरी निगाह अब भी उसी सिम्त है मगर
    खिड़की पे उस को आए ज़माने गुज़र गए
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    Navneet krishna
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    इश्क़ में धोखा खाने वाले
    हम है दर्द छुपाने वाले

    तुम को इक दिन आना होगा
    रूठ के मुझ सेे जाने वाले
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    Navneet krishna
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    तोड़ डाला नशा को तेरी याद ने
    होश में ऐसे मैं आज आता नहीं
    Navneet krishna
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    इन हवाओं में ज़रा सी ख़ुशबू हज़रत घोलिए
    थोड़ी हिंदी थोड़ी सी उर्दू यहाँ पर बोलिए
    Navneet krishna
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    दोस्ती की है अगर तू ने निभाऊँगा जरूर
    क़र्ज़ अपना मैं मेरे यार चुकाऊँगा ज़रूर

    जब तेरे सामने जाने की कभी सोचूँगा
    इन निगाहों में नया ख़्वाब सजाऊँगा ज़रूर
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    Navneet krishna
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    लोग बेचैन हैं बाजार में छाने के लिए
    कुछ तो गिर जाते हैं अख़बार में आने के लिए
    Navneet krishna
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    वक़्त पे काम अब कोई आता नहीं
    साथ गर्दिश में अपना निभाता नहीं

    हाथ यूँ तो मिलाते है अक्सर यहाँ
    दिल से दिल आज कोई मिलाता नहीं
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    Navneet krishna
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