Navneet krishna

Navneet krishna

@Navneet_krishna

Navneet krishna shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Navneet krishna's shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

20

Content

85

Likes

503

Shayari
Audios
  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
ग़म-ज़दा गीत गुनगुनाना है
हाल-ए-दिल आप को सुनाना है
Navneet krishna
यक़ीं किस तरह कोई उनपे करेगा
वो खाते हैं झूठी क़सम देखते हैं

नहीं जिस की ता'बीर कोई जहाँ में
वही ख़्वाब हम ऐ सनम देखते हैं
Read Full
Navneet krishna
उस ने बुलवाया मुझे जाना पड़ा
बे-सबब ही मुझ को मुस्काना पड़ा
Navneet krishna
आप को अपना बनाना चाहता हूँ
इक नई दुनिया बसाना चाहता हूँ

आप को मैं आज़माना चाहता हूँ
इक नया ये कारनामा चाहता हूँ
Read Full
Navneet krishna
इक इंक़लाब नया आज हो गया है क्या
मुझे ज़माने ने ख़ुद ही बदल दिया है क्या
Navneet krishna
इंसाँ के ज़मीरों को जला देती है ग़ुर्बत
कुछ बात है दर उस का अँधेरे में खुला है
Navneet krishna
अगरचे ये सच है कि कम देखते हैं
मुहब्बत से तुझ को जो हम देखते हैं
Navneet krishna
मैं वो मजदूर हूँ जो दुनियाँ में
झोपड़ी को महल बनाता हूँ
Navneet krishna
ये दर्द भी वफ़ाओं में यूँँ ढो रहा हूँ मैं
तेरे अलावे और का भी हो रहा हूँ मैं
Navneet krishna
खिलते ही नहीं फूल दिल-ओ-जाँ- के हमारे
दिल को तेरी उल्फ़त में सदा ज़ख़्म मिला है
Navneet krishna
मुझ को ये नज़र आया के वो एक बला है
कुछ ख़्वाब है कुछ अस्ल है कुछ तर्ज -ए- अदा है

वो ग़ैर की आग़ोश में रहने लगा शादाँ
उस को नहीं मालूम के दिल मेरा जला है
Read Full
Navneet krishna
घुट-घुट के जिए मर न सके हाए रे क़िस्मत
इस दौर में जीना भी मेरी जान कला है
Navneet krishna
क्या थे क्या हो गए हैं हम
याद-ए-जानाँ में खो गए हैं हम

पेड़ पर फल ज़रूर आएगा
प्यार के बीज बो गए हैं हम
Read Full
Navneet krishna
दिल हमारा तो रेज़ा-रेज़ा है
आप क्यूँ तार-तार करते हैं
Navneet krishna
उसे मैं जानता हूँ अब
जो लोगों को बनाता है

रहे नवनीत से आशा
नई वो धुन सुनाता है
Read Full
Navneet krishna
किसी दिन वो सुनेगा भी
परायों का सुनाता है
Navneet krishna
तेरी बातों में हम रह गए
ख़ुदस ग़ाफ़िल सनम रह गए

उन को दुनिया की सब राहतें
मेरे हिस्से में ग़म रह गए
Read Full
Navneet krishna
तारे नफ़स पर उँगली रख दी छेड़ के तू ने बात ग़ज़ल की
नोके क़लम से क़तरा-क़तरा जारी हैं रिशहात ग़ज़ल की
Navneet krishna
वक़्त कब मुझ को आज़माता है
वक़्त को मैं ही आज़माता हूँ
Navneet krishna
एक क़िस्सा वफ़ा का सुना दीजिए
दर्द-ए-दिल को ज़रा अब बढ़ा दीजिए

मेरे अल्ला कब तक शब-ए-हिज्र ये
मुझ को महबूब से फिर मिला दीजिए
Read Full
Navneet krishna

LOAD MORE