अगर मैं कह दूँ मेरे हाल-ए-दिल का हाल सब है ठीक
    यही तो वक़्त है जाँ सीने से मुझ को लगाने का
    Naresh sogarwal 'premi'
    3 Likes
    मुझे अच्छा नहीं लगता कोई हमदर्द भी मेरा
    वफ़ा की बात है तो फिर करे कोई वफ़ा हम सेे
    Naresh sogarwal 'premi'
    2 Likes
    तुम्हें ज़रूर हिफ़ाज़त से कोई रक्खेगा
    मगर दवा कहाँ से हिज्र की वो लाएगा
    Naresh sogarwal 'premi'
    2 Likes
    ये हुनर भी लिखने का मुझ में तो नहीं था पर
    इश्क़ जो भी करते हैं शा'इरी ही करते हैं
    Naresh sogarwal 'premi'
    1 Like
    मेरी सुब्ह और रात का विवाद तो ये है
    मुझ को लगती है सिगार सोने और जगने में
    Naresh sogarwal 'premi'
    1 Like
    मिरा अब नहीं लगता दिल तो कहीं भी
    हक़ीक़त ये मैं हूँ भी और अब नहीं भी

    जी ऐसे रहा हूँ कि मेरा कोई नइँ
    मैं घर पहले रहता था और अब कहीं भी

    मिरे साथ ख़्वाबों की दुनिया है लेकिन
    हक़ीक़त में इक ख़्वाब-दीदा नहीं भी
    Read Full
    Naresh sogarwal 'premi'
    1 Like
    जितनी भी ख़्वाहिशें थी सभी मेरी थीं
    जितने भी ख़्वाब थे सब के सब तेरे थे
    Naresh sogarwal 'premi'
    2 Likes
    तू मिलने से हर बार मुकरा करेगी
    मिरी ईद अब यूँँ ही गुजरा करेगी
    Naresh sogarwal 'premi'
    2 Likes
    ज़िन्दगी में रहे संग तीनों ही हम
    मैं मिरी ये क़लम और मेरा ये ग़म
    Naresh sogarwal 'premi'
    3 Likes
    ख़ुशी और ग़म का तो आलम यही है
    कि सिगरेट जलती है दोनों समाँ पर
    Naresh sogarwal 'premi'
    1 Like

Top 10 of Similar Writers