ग़मों में डूब कर ये सोचता हूँ
    मिली ख़ुशियाँ जहाँ पे ग़म वहीं क्यूँ
    Ranjan Kumar Barnwal
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    दुनिया में ये हरदिन हर-पल होता है
    चाहत में ही आशिक़ सब कुछ खोता है
    Ranjan Kumar Barnwal
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    इश्क़ में सब कुछ हक़ीक़त
    मैं भी क्या क्या सोचता हूँ
    Ranjan Kumar Barnwal
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    फ़रेबी लोग थे सारे मिरे अपने पराए सब
    यहाँ अहमक़ बना हूँ मैं भरोसा कर के लोगों पे
    Ranjan Kumar Barnwal
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    दिल के दरवाज़े पे पहरेदार कैसा
    चाहने वालों से ये व्यवहार कैसा

    इक नज़र में दिल मिरा घाइल हुआ है
    उस की आँखों में छुपा हथियार कैसा

    जो निभानी पड़ रही मजबूरियों में
    सोचता हूँ मैं भी ये किरदार कैसा

    भूख की ख़ातिर जो फिरता दर बदर है
    वो कभी समझा कहाँ त्यौहार कैसा
    इश्क़ के अंजाम से मैं डर रहा हूँ
    कर रहा 'रंजन' ये कारोबार कैसा
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    Ranjan Kumar Barnwal
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    यहीं पर बग़ल में हो लेकिन
    बहुत दूर बैठे हो मुझ सेे
    Ranjan Kumar Barnwal
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    उस ने माँगा था बस छोटा सा पत्थर
    मैं जा कर सागर से मोती ले आया
    Ranjan Kumar Barnwal
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    अबद हो रही है हमारी मुहब्बत
    ये जैसे अज़ल से चली आ रही है
    Ranjan Kumar Barnwal
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    तुम्हारे हुस्न का वर्णन है मुश्किल
    तुम्हें ऐसे तराशा जा चुका है
    Ranjan Kumar Barnwal
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    करने लगा सब याद मैं
    या'नी हुआ बर्बाद मैं

    इस इश्क़ में अव्वल थे तुम
    औ' फिर तुम्हारे बा'द मैं

    वीरान है कितनों का घर
    कैसे करूँँ आबाद मैं

    पंछी को देकर इक क़फ़स
    कब तक फिरूँ आज़ाद मैं

    रंजन गया सब छोड़कर
    करता रहा फ़रियाद मैं
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    Ranjan Kumar Barnwal
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