ता'रीफ़ें 'सरकार' अकेले करती हैं
    महफ़िल में पहचान बतानी पड़ती है
    Sandeep kushwaha
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    जन सेवा के मार्ग हज़ारों हैं लेकिन
    नेता जी को मोक्ष मिलेगा संसद में
    Sandeep kushwaha
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    वो एक वक़्त था उन को गुमान था हम पर
    ये एक वक़्त है हम सेे नज़र नहीं मिलती
    Sandeep kushwaha
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    ये रोना,मुस्कुराना,आह भरना,और जिए जाना
    यही तो ज़िंदगी है ज़िंदगी कुछ और भी है क्या
    Sandeep kushwaha
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    हम को जिस की तलाश थी अब तक
    कोई उस को तलाश बैठा है
    Sandeep kushwaha
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    ये तेरा रंग नया है तू सँभलियो प्यारे
    रंग उतरे तो ये दीवार बुरी लगती है
    Sandeep kushwaha
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    अब क्यूँँ मेरे ज़ख़्म भला नासूर हुए ?
    मैं तो सबकी ख़ातिर मरहम होता हूँ
    Sandeep kushwaha
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    वो एक काम जो सौंपा गया था सूरज को
    मलाल है कि इक चराग़ कर रहा है उसे
    Sandeep kushwaha
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    अपनी नाकामी से भी ख़ुश होता हूँ
    नाकामी के क़िस्से अच्छे होते हैं
    Sandeep kushwaha
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    रस्मन कब तक हाथ मिलाए जाते हम
    दिल मिलने की थोड़ी तो गुंजाइश हो
    Sandeep kushwaha
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