Sandeep kushwaha

Sandeep kushwaha

@Sandeep_1999

Sandeep kushwaha shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Sandeep kushwaha's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
कोई बात नहीं कहने वाले लड़के
बातों का अंबार छुपाए रखते हैं
Sandeep kushwaha
रिश्तों में अब दूरी रखना जायज़ भी है
ज़्यादा ज़ूम करे, फ़ोटो धुँदला जाती है
Sandeep kushwaha
इतनी भी तेज़ आप की आँखें नहीं हैं ,आप
जो देख पा रहें हैं हक़ीक़त नहीं है ये

दर पे जो आ गया हूँ तो ख़िदमत का ढोंग भी
रस्मन निभा रहे हो तो ख़िदमत नहीं है ये
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Sandeep kushwaha
याद का क्या है वो कब और किधर आ जाए
अब तो मुमकिन ही नहीं उन की ख़बर आ जाए

इत्तिफ़ाक़न ही जो खोलूँ कभी खिड़की अपनी
इत्तिफ़ाक़न ही मेरा यार नज़र आ जाए
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Sandeep kushwaha
हुस्न लुटाएगा ख़ुशबू कब तक हम ने
नदियों को भी जंगल होते देखा है
Sandeep kushwaha
ता'रीफ़ें 'सरकार' अकेले करती हैं
महफ़िल में पहचान बतानी पड़ती है
Sandeep kushwaha
जन सेवा के मार्ग हज़ारों हैं लेकिन
नेता जी को मोक्ष मिलेगा संसद में
Sandeep kushwaha
वो एक वक़्त था उन को गुमान था हम पर
ये एक वक़्त है हम सेे नज़र नहीं मिलती
Sandeep kushwaha
ये रोना,मुस्कुराना,आह भरना,और जिए जाना
यही तो ज़िंदगी है ज़िंदगी कुछ और भी है क्या
Sandeep kushwaha
हम को जिस की तलाश थी अब तक
कोई उस को तलाश बैठा है
Sandeep kushwaha
ये तेरा रंग नया है तू सँभलियो प्यारे
रंग उतरे तो ये दीवार बुरी लगती है
Sandeep kushwaha
अब क्यूँँ मेरे ज़ख़्म भला नासूर हुए ?
मैं तो सबकी ख़ातिर मरहम होता हूँ
Sandeep kushwaha
वो एक काम जो सौंपा गया था सूरज को
मलाल है कि इक चराग़ कर रहा है उसे
Sandeep kushwaha
जुगनुओं के वास्ते सूरज से झगड़ा मोल ले
ये हिमाक़त भी किसी सूरज के बस की बात है
Sandeep kushwaha
अपनी नाकामी से भी ख़ुश होता हूँ
नाकामी के क़िस्से अच्छे होते हैं
Sandeep kushwaha
बिकने को तो बिकती है खु़द्दारी भी
बस थोड़ा-सा रेट ज़ियादा करती है
Sandeep kushwaha
रस्मन कब तक हाथ मिलाए जाते हम
दिल मिलने की थोड़ी तो गुंजाइश हो
Sandeep kushwaha