Ashkrit Tiwari

Top 10 of Ashkrit Tiwari

    तबीब को थमा के नब्ज़ आज बैठा हूँ
    दवा है इश्क़ मगर ला-इलाज बैठा हूँ
    Ashkrit Tiwari
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    इमारतों का दुख तुम्हें नहीं दिखा है अब तलक
    छू कर सतह को तुम ने महज़ धूल ही हटाई है
    Ashkrit Tiwari
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    उसे अपना कहा बस आजमाइश ही नहीं माँगी
    ख़ुदा माँगा तो पर उस की नवाज़िश ही नहीं माँगी

    महीने भर से प्यासा छटपटाता मर गया था मैं
    वो बादल आए तो थे मैं ने बारिश ही नहीं माँगी
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    Ashkrit Tiwari
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    एक दिन हम कर्ण भी बन जाएँ लेकिन
    मित्र कह कर कोई दुर्योधन पुकारे
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    एक ऐसी जंग होती है दिमाग-ओ-दिल में मेरे
    कोई अच्छा भी लगे तो कहने भर से डरता हूँ मैं
    Ashkrit Tiwari
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    देख यूँँ ही अब बदलता रहता है सब
    काश सब कुछ माँ के जैसा एक सा हो
    Ashkrit Tiwari
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    है वक़्त का कोई तक़ाज़ा या जुनूँ बाक़ी मेरा
    मैं लिख रहा हूँ जिस्म पर जब तक है ख़ूँ बाक़ी मेरा
    Ashkrit Tiwari
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    वो थी ग़ज़ल सो ध्यान से लोगों ने सब सुना
    मैं नुक़्ता था जो ठीक पढ़ा भी नहीं गया
    Ashkrit Tiwari
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    कहाँ ख़ुद पे फिर मेरा क़ाबू चलेगा
    वो आवाज सुनली तो जादू चलेगा
    Ashkrit Tiwari
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    ज़ख़्म के आलम पे ही पर्दा रखा है
    आँच पर पलता हुआ सपना रखा है

    उठ चली है अजनबी हर्फ़-ए-तमन्ना
    ज़ेहन और दिल उस ने ही महका रखा है

    दूर देखा था जिसे नज़दीक है वो
    शहर ने गाँवों को यूँँ अपना रखा है

    वो अजल की शाम मौला नाम तेरे
    ये अजल के नाम वो चेहरा रखा है

    तुम भी अन्वेषी हो उन ज़ुल्फ़ों के क़ैदी
    जिन अजब तस्वीरों से रिश्ता रखा है
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