Dipanshu Shams

Top 10 of Dipanshu Shams

    बन के चुभती है मुझे ख़ार मिरी बेचैनी
    और राहत की तलबगार मिरी बेचैनी

    अब कोई दोस्त भी हैरान नहीं होता है
    मसअला रोज़ का है यार मिरी बेचैनी

    अव्वलन शे'र न कहने का सबब बनती है
    ख़ुद ही कहती है फिर अश'आर मिरी बेचैनी

    मैं तो ज़रिया हूँ फ़क़त सूरत-ए-क़लम-ओ-काग़ज़
    है हक़ीक़त में क़लमकार मेरी बेचैनी

    अब असीरी में तिरी आने लगा लुत्फ़ बहुत
    रख मुझे यूँँ ही गिरफ़्तार मिरी बेचैनी
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    Dipanshu Shams
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    सड़क किनारे लगा के दुकान रंगों की
    तमाम तितलियाँ रंग अपने बेच देती हैं
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    तमाम शब एक ख़ूब-सूरत सा ख़्वाब देखा
    हसीन बाहों में 'चाँदनी' का गुलाब देखा
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    दबा न पाया ये इत्र तक भी
    तेरे बदन की महक को यारा
    Dipanshu Shams
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    न सर पे पल्लू न लड़की हिजाब माँगे है
    ये अच्छे कल के लिए बस किताब माँगे है
    Dipanshu Shams
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    मरासिम और गहरे कर लिए हम ने
    बना के दोस्त को अपने बड़ा भाई
    Dipanshu Shams
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    हर साल इंतिज़ार मुलाक़ात का हुआ
    हर साल मिल न पाए दिसबंर से जनवरी
    Dipanshu Shams
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    सुब्ह से शाम तलक धूप को तकते तकते
    आँख जाती है छलक धूप को तकते तकते

    सर्द मौसम ने उसे कितना सताया होगा
    जिस ने झपकी न पलक धूप को तकते तकते

    आफ़ताब आ मेरी रग़ रग़ में शरारे भर दे
    बढ़ती जाए है ललक धूप को तकते तकते

    हर जगह ढूँढ़ने के बा'द दिखी है मुझ को
    आप की एक झलक धूप को तकते तकते

    रक़्स करते है हवाओं के रिदम पर मिल कर
    ये ज़मीं और फ़लक धूप को तकते तकते
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    Dipanshu Shams
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    इश्क़ बहरा हो गया
    एक शक की गूँज से
    Dipanshu Shams
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    ज़िन्दगी को हसीं एक इन'आम दूँ
    सोचता हूँ मोहब्बत इसे नाम दूँ

    हो मिरे घर में औलाद जुड़वाँ अ
    गर
    नाम इक को अली, दूजे को राम दूँ
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    Dipanshu Shams
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