Dipanshu Shams

Dipanshu Shams

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Dipanshu Shams shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Dipanshu Shams's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm
पक्का है इंतिज़ाम ज़रा इंतिज़ार कर
लेंगे ये इंतिक़ाम ज़रा इंतिज़ार कर

सय्याद बुन रखा है परिंदों ने अब की जाल
होगा तू ज़ेर-ए-दाम ज़रा इंतिज़ार कर
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Dipanshu Shams
तन्हाई ख़ामोशी उस की यादें और मैं
रहते हैं इक कमरे में सब यार ख़ुशी से
Dipanshu Shams
जो गा रहा बज़्म में मुसल्सल अदब के नग़्में
हुज़ूर लहजा उसी का बाहर ख़राब देखा
Dipanshu Shams
सिगरेट पीं हज़ार बहुत मयकशी हुई
बर्बाद अच्छी ख़ासी मियाँ ज़िन्दगी हुई

वैसा किया था काम कि जैसा पड़ा था नाम
आवारा कह रहे थे सो आवारगी हुई
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Dipanshu Shams
ऐ राहगीर राह से चालाकियाँ नहीं
रहबर बड़े बड़े ये ठिकाने लगा चुकी
Dipanshu Shams
बहकी बहकी इन फ़ज़ाओं ने शराबी कर दिया है
लब गुलों के चूम कर मौसम गुलाबी कर दिया है

मैं महकने को महक सकता हूँ ख़ुशबूदार भी हूँ
चाहतों ने फूल मुझ को पर किताबी कर दिया है
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Dipanshu Shams
जो चाहे बेवफ़ाई कर रही है
वफ़ा की आँखों पर पट्टी बंधी है

यक़ीं का क़त्ल करते वक़्त बेशर्म
नहीं इक पल को भी सहमी डरी है
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Dipanshu Shams
टूटे हैं हाथ पाँव कई इन की वजह से
बिगड़ा न बे-लगाम ज़ुबानों का कुछ मगर
Dipanshu Shams
मेरी हर एक मुश्किल में नजूमी की तरह अक्सर
परेशाँ क्यूँँ है माथा देख कर पूछा है वालिद ने
Dipanshu Shams
होना ये चाहती हैं मुकम्मल अब ऐ ख़ुदा
मासूम ख़्वाहिशें मेरी ज़िद्दी ज़रूरतें
Dipanshu Shams
इस तेरे मेरे के झगड़े में
केवल रिश्ते छलनी होते हैं
Dipanshu Shams
तेरे बस की बात नहीं है रहने दे
जुगनू दिन है रात नहीं है रहने दे
Dipanshu Shams
हैं दोस्तों में बहुत ख़ास दोस्त अपने दो
हम उन को प्यार से दुख-सुख बुलाया करते हैं
Dipanshu Shams
राज दुनिया पे चले मेरा ये कहने वाला
आदमी रहता है दुनिया के किसी कोने में
Dipanshu Shams
कद्र-ए-फ़न अब कौन करता है यहाँ
नाम चेहरे यार पर सब हैं फ़िदा
Dipanshu Shams
ग़लत को ग़लत कहना प्यारे
यही आज सब से ग़लत है
Dipanshu Shams
तुझे मेरा ठिकाना ढूँढ़ना है तो अँधेरा कर
अरे पगले अँधेरे में ही तो जुगनू चमकता है
Dipanshu Shams
गर्मी की सुब्ह-सुब्ह की ठंडी हवा हो तुम
इस लू लगे मरीज़ की जाना शिफ़ा हो तुम

जिस को में हँसते-हँसते करूँँ शौक़ से क़ुबूल
ऐसे ही एक जुर्म की प्यारी सज़ा हो तुम
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Dipanshu Shams
पार इस हद्दे-जुनूँ को अपने हर पल हम करेंगे
या तो पागल हम बनेंगे या तो पागल हम करेंगे
Dipanshu Shams
जो अड़ गए अना में वो सारे खड़े रहे
जो बह गए बहाव में आगे चले गए
Dipanshu Shams

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