Asad Khan

Top 10 of Asad Khan

    वैसे तो उम्र थी पढ़ाई की
    ख़ैर हम ने ग़ज़ल सराई की
    Asad Khan
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    जीने की बात चल रही है दोस्त
    ज़िंदगी क्यूँ मचल रही है दोस्त

    वस्ल के दिन है और ख़ाली है जेब
    सो मुलाक़ात टल रही है दोस्त
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    Asad Khan
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    इस जवानी का फ़साना भूल जाऊॅं
    ज़ख़्मी हूँ तो दिल लगाना भूल जाऊॅं

    या'नी तुझ को याद करना बंद कर दूँ
    या'नी मेरी जाँ मैं खाना भूल जाऊॅं
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    दुख में याद आती है उसी की मुझे
    कितने रस्ते हैं इक गली की तरफ़
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    इन्हें मालूम है रुतबा हमारा
    सो ये सुनते नहीं रोना हमारा

    बिता दी उम्र सारी इस गुमाँ में
    अभी तो ज़िंदा है रिश्ता हमारा

    तेरी तस्वीर जब होती थी इस
    में
    भरा ही रहता था बटवा हमारा

    वो वाली बेंच पर तुम बैठना सिर्फ़
    वहाँ पर नाम लिख देना हमारा

    मुहब्बत में गुज़ारी थी जवानी
    बुढ़ापे में हुआ झगड़ा हमारा
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    Asad Khan
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    ख़ुदाया गुज़ारिश है ईमान के साथ
    उसे लौटा दे फिर से रमज़ान के साथ
    Asad Khan
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    देख कर ईद का चाॅंद मैं करता क्या
    तेरी तस्वीर तो कमरे में रक्खी है
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    जुदा होने वाले मेरी बात तो सुन
    तू आ या न आ, तेरी याद आ रही है
    Asad Khan
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    उसे मिली है सहूलत ये हुस्न से अपने
    वो क़त्ल कर दे तो इल्ज़ाम भी नहीं आता
    Asad Khan
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    सब शुरू में हम सेे अच्छा बोलते हैं
    बे-सबब फिर उल्टा सीधा बोलते हैं

    रात जंगल में गुज़ारी तो ये पाया,
    पेड़ इक दूजे से कितना बोलते हैं
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