Asad Khan

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@Shayar_Asad

Asad Khan shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Asad Khan's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
जब तेरी दीद हो गई होगी
किसी की ईद हो गई होगी

तेरा यूँँ छोड़ जाना बनता था
मुझ को उम्मीद हो गई होगी
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Asad Khan
मेरे पीछे ज़माना पड़ गया है
गले रब को लगाना पड़ गया है

बनाना था कहीं पर ग्लोब हम को
तेरा चेहरा बनाना पड़ गया है
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Asad Khan
वो मेरी बात को समझता नहीं
रात भर रात को समझता नहीं

फिर से इस दिल ने इश्क़ कर लिया है
ये कभी ज़ात को समझता नहीं
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Asad Khan
बीत जाऊँगा मैं तो लम्हा हूँ
फिर न आऊँगा चाहे जैसा हूँ

वक़्त से मेरी रेस लग गई थी
मैं उसे पीछे छोड़ आया हूँ
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Asad Khan
वक़्त से मेरी रेस लग गई थी
मैं उसे पीछे छोड़ आया हूँ
Asad Khan
वो मेरी आँखों में डर देखता है
यक़ीनन मुझ से बेहतर देखता है
Asad Khan
कभी लौटी नहीं फिर वो कलाई
अभी तक बैठा हूँ कंगन सँभाले
Asad Khan
हर ज़िन्दगी की ये ज़रूरत होती है
यूँँॅं ही नहीं हम को मुहब्बत होती है

कोई न कोई हादसा भी चाहिए
तब जा के लोगों से इबादत होती है
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Asad Khan
क्या ज़रूरी है शब-ए-वस्ल में जागा जाए
क्या ज़रूरी है हमेशा दिए जलते रक्खें
Asad Khan
अब से तुम भी ग़ज़ल कहो प्यारे
ज़िंदगी को अजल कहो प्यारे

उस को बस मेरी दिलरुबा ही नहीं
मेरी मेहनत का फल कहो प्यारे
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Asad Khan
हमारे अपनों को जाता भी देखा
फिर उन का बा'द में रस्ता भी देखा

जिसे सोने से पहले देखा मैं ने
उसी को ख़्वाब में मरता भी देखा
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Asad Khan
उस ने हम पे कई इल्ज़ाम तो झूठे रक्खे
हम ने फिर भी मियाँ मज़बूत कलेजे रक्खे

मैं तो क्या सोच के दाख़िल हुआ घर में और फिर
रह गए गजरे यूँँ ही मेज़ पे रक्खे रक्खे
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Asad Khan
कोई हीरा नहीं है गट्ठर में
क्यूँ पड़े हो तुम इस के चक्कर में

किसी ने जंग को पुकारा था
किसी को छोड़ आया बिस्तर में
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Asad Khan
ज़बाँ तो उस की भी हकला रही थी
मेरी गाड़ी भी छूटे जा रही थी

मुहब्बत वो भी ग़ुर्बत में मुहब्बत
कमाई आ रही थी जा रही थी
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Asad Khan
दिल परेशान भी गुज़र जाता
तेरा तूफ़ान भी गुज़र जाता

तू जो लौट आता चाँद रात अगर
मेरा रमज़ान भी गुज़र जाता
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Asad Khan
लड़ पड़ेंगे लोग सो बातें फ़सादी नइॅं करूँँगा
इस ख़राबे में ज़ियादा और ख़राबी नइॅं करूँँगा
Asad Khan
कि शहज़ादा किसी के साथ शहज़ादी किसी के साथ
नहीं चाहा था फिर भी हो गई शादी किसी के साथ
Asad Khan
उस की सभी बातों पे पर्दा होता है
ऊपर से उस का मीठा लहजा होता है

अब सामने हूँ तेरे मुझ को देख तो
ठहरा हुआ दरिया भी कैसा होता है
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Asad Khan
वैसे तो उम्र थी पढ़ाई की
ख़ैर हम ने ग़ज़ल सराई की
Asad Khan
जीने की बात चल रही है दोस्त
ज़िंदगी क्यूँ मचल रही है दोस्त

वस्ल के दिन है और ख़ाली है जेब
सो मुलाक़ात टल रही है दोस्त
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